लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम ने केदारनाथ धाम यात्रा की रंगत फीकी कर दी है। धाम सहित मद्महेश्वर, तुंगनाथ सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर गिनती के श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कपाट खुलने के बाद केदारनाथ में जहां सिर्फ 17 दिन में एक लाख यात्री पहुंच गए थे। वहीं अन्य दोनों धामों में भी पहले पखवाड़े में चार हजार शिव भक्तों ने दर्शन किए।
पहले दिन से रुद्रप्रयाग से लेकर गौरीकुंड और ऊखीमठ के अधिकांश होटल-लॉज बुक हो गए थे। कई होटलों को तो 31 मई से लेकर जून पहले सप्ताह तक की बुकिंग मिल गई थी। कमरों का किराया ढाई से पांच हजार रुपये में मिले। होटल व लॉज मालिकों का कहना था कि आपदा के बाद जिस तरह से इस वर्ष यात्री उमड़े हैं, उनके बीते तीन वर्ष का घाटा पहले 15 दिन में पूरा हो गया था।
अमूमन छोटे से छोटे व्यवसायी की प्रतिदिन पांच से दस हजार के बीच आमदनी हुई है। जून माह के शुरू होते ही यात्रा का उल्लास पटरी से उतरने लगा। स्थिति यह है कि गुप्तकाशी में होटल के कमरों का किराया ढाई से तीन सौ रुपये के बाद भी यात्री नहीं मिल पा रहे हैं।
हेली सेवा भी हुई प्रभावित
केदारनाथ यात्रा के लिए 9 मई से शुरू हुई हेलीकाप्टर सेवा के तहत 13 कंपनियों में से अधिकांश को 30 जून तक की एडवांस बुकिंग मिल गई थी। स्थिति यह थी कि यात्रियों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा था।
बारिश और खराब मौसम से 22 जून से हेली कंपनियों को गिनती के यात्री मिल रहे हैं। जिन कंपनियों को एडवांस बुकिंग मिली थी, वे भी लौट गई हैं। घाटी में सिर्फ तीन कंपनियां रह गई हैं।
जीएमवीएन की आय हुई प्रभावित
यात्रा कम होने से जीएमवीएन की आय भी प्रभावित हुई है। 15 दिन से तो यहां गिनती के यात्री ही खाना खा रहे हैं। 31 मई तक निगम को करीब तीन करोड़ की आय हो गई थी। जून माह में 35 फीसदी आय में गिरावट आई है, जो अब और भी कम हो गई है।
वाहनों को नहीं मिल रही सवारी
इस वर्ष भी केदारनाथ यात्रा का संचालन सोनप्रयाग से हो रहा है। यहां से छोटे वाहनों से यात्री गौरीकुंड पहुंच रहे हैं। मई माह में सोनप्रयाग से गौरीकुंड के लिए जहां चालीस से अधिक वाहन थे, जो दिनभर में कम से कम पांच से आठ दो तरफा चक्कर लगा रहे थे। वहीं पिछले 15 दिन से कई वाहनों को एक चक्कर भी नसीब नहीं हो रहा है।
दोपहर बाद मंदिर में सन्नाटा
केदारनाथ मंदिर में दोपहर बाद गिनती के यात्री दिख रहे हैं। पिछले चार दिन में दो बजे के बाद यहां एक भी यात्री नहीं था, जो दर्शनों को आया हो। जबकि कपाट खुलने के बाद से 31 मई तक मंदिर में प्रात: 5 बजे से शाम 7 बजे तक लाइन लगी रहती थी। इधर तृतीय केदार तुंगनाथ व द्वितीय केेदार मद्महेश्वर में भी गिनती के श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।