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75 रुपये में मिल रहा 40 लीटर पानी

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water probalam - फोटो : amarujala
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75 रुपये में 40 लीटर पानी का ड्रम खरीदने को विवश हैं क्वीलाखाल के ग्रामीण। यहां निवास कर रहे 30 परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरह रहे हैं। आधी रात तक ढाई किमी दूर से बच्चे भी पीठ पर पानी से भरे बर्तन ढोने को विवश है। बावजूद यहां की सुध नहीं ली जा रही है।

जखोली ब्लाक में ग्राम पंचायत क्वीलाखाल में पेयजल संकट त्रासदी का रूप ले चुका है। स्थिति यह है कि घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों व अन्य जरूरतमंदों को मजदूरी में अपने लिए पानी का इंतजाम कराना पड़ रहा है। 40 लीटर पानी के एक ड्रम के लिए 75 रुपये देने पड़ रहे हैं। गांव की वृद्धा सावित्री देवी, बसंती देवी, लक्ष्मी देवी, दर्शन देवी, सुरेशी देवी का कहना है वे ढाई किमी दूर स्रोत से पानी जुटाने में असक्षम हैं। ऐसे में मजदूरी में पानी मंगाना पड़ रहा है। ग्रामीणों को रोजाना पीने का पानी जुटाने के लिए ढाई किमी दूर तलपंदेरा प्राकृतिक स्रोत की दौड़ लगानी पड़ रही है। वहां भी 15 दिनों से पानी के स्राव में कमी होने से अब घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। शाम पांच बजे के बाद से बच्चे और महिलाएं पानी जुटाने में जुटी हुई हैं।
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पानी बना पलायन का कारण
क्वीलाखाल गांव से ग्रामीणों के पलायन का मुख्य कारण पानी है। यहां सरकारी योजना दम तोड़ रही है। ऐसे में 120 परिवारों वाले इस गांव में 30 परिवार रह गए हैं। उसमें भी गिनती के 76 लोग हैं। बावजूद यहां की सुध नहीं ली गई। शादी व अन्य समारोह में यहां ग्रामीणों को पानी जुटाने के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि पीने का पानी भी खरीदना पड़ रहा है। पानी को कुछ लोगों ने व्यवसाय बना दिया है जो स्रोतों से रातभर पानी के ड्रम भर रहे हैं। वे घोड़े-खच्चरों से ढोकर 75 रुपये में 40 लीटर पानी बेच रहे हैं। ग्रामीणों के विरोध के कारण चार दिन से ये लोग अब नजर नहीं आ रहे हैं। - गजेंद्र भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता क्वीलाखाल
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वर्षों पहले बनी पेयजल योजना का पानी गांव तक नहीं पहुंच रहा है। शासन- प्रशासन और विभाग को अवगत कराने पर भी स्थिति पूर्ववत बनी हुई है। रोजाना पानी के लिए ढाई किमी की दौड़ लगा रहे है। लोग जैसे-तैसे अपने हलक तर कर रहे हैं। मवेशियों के लिए पर्याप्त पानी नहीं हो रहा है। इस वर्ष बारिश नहीं होने से हालात गंभीर हो रहे हैं।- सुरेशी देवी, ग्राम प्रधान क्वीलाखाल
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