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प्राचीन कुंडों की नहीं ली गई सुध

Tue, 26 Apr 2016 06:59 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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केदारनाथ आपदा को तीन वर्ष होने वाले हैं। बावजूद इसके तमाम दावों के बावजूद धाम में ध्वस्त हुए प्राचीन कुंडों की आज तक सुध नहीं ली गई है। ऐसे में इस वर्ष भी बाबा केदार के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं को कुंडों के दर्शन नहीं हो पाएंगे।
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भगवान आशुतोष के 11वे ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम को पांच पर्वत, पांच नदी धाराओं और पांच कुंडों की भूमि कहा जाता है। इसका उल्लेख हमारे वेद-पुराणों में भी है। केदारनाथ में मौजूद प्रत्येक कुंड का धार्मिक महत्व है। इन कुंडों का जल अमृत के समान पवित्र माना गया है। आपदा में मंदिर के आसपास सभी पांच कुंड मलबे में दब गए थे। वर्ष 2014 में बीकेटीसी ने निम के सहयोग से मलबे की सफाई कर मंदिर के समीप उदक कुंड को खोज निकाला था। बाकी चार कुंडों का अब तक पता नहीं लगा है। राज्य सरकार की ओर से केदारनाथ पुनर्निर्माण के तहत कुंडों को पुन: संजोने की बात कह गई थी। वहीं, केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी नमामि गंगे योजना में धाम में मौजूद कुंडों के पुर्नरुद्धार का आश्वासन दिया था। बावजूद इसके कुंडों को खोजने के लिए कोई काम नहीं हुआ है।

हंस कुंड
केदारनाथ मंदिर से करीब 100 मीटर दूर दाईं ओर प्रवचन हॉल के बगल में स्थित था। हंस कुंड/तर्पण कुंड में पितरों का श्राद्ध किया जाता है। आत्मा की शांति के लिए जन्म कुंडली और दाह संस्कार की राख को कुुंड में विसर्जित किया जाता है। मान्यता है कि इस स्थान पर पिंड दान करने से वह पितरों को प्राप्त होता है। केदारखंड में कहा गया है कि यहां ब्रह्मा जी ने हंस रूप धारण किया था।
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रेतस कुंड  
मंदिर से करीब 500 मीटर दूर सरस्वती नदी केे तट पर स्थित है। केदारखंड में लिखा गया है कि इस कुंड के जलपान से मनुष्य शिवरूप हो जाता है। कहा जाता है कि यहां ऊं नम: शिवाय का जप करने पर पानी के बुलबुुले उठते  थे।

अमृत कुंड
केदारनाथ में मंदिर के पृष्ठ भाग में स्थित है यह कुंड। कुंड के जल को श्रद्धालु अपने ऊपर छिड़कते हैं। कुंड अब भी आपदा के मलबे से ढका हुआ है।

उदक कुंड
मंदिर से करीब 100 मीटर पहले स्थित है। कहा जाता है कि मंदिर के अंदर स्थित शिवलिंग को चढ़ाया गया जल इस कुंड में एकत्रित होता है। श्रद्धालु इस जल को प्रसाद के रूप में अपने घरों को लाते हैं।

हवन कुंड
मंदिर परिसर में आगे की ओर स्थित है। आपदा से पहले यात्राकाल में इस पावन कुंड में सुख-समृद्धि के लिए हवन होते हैं। अब तक इस कुंड का निर्माण नहीं हो पाया है।

गौरीकुंड का तप्तकुंड बदहाल
आपदा प्रभावित गौरीकुंड में ध्वस्त तप्तकुंड की मरम्मत नहीं हो पाई है। मंदाकिनी नदी किनारे कुंड का पानी रिसने से प्लास्टिक के पाइपों से संरक्षित किया गया है। स्थायी ट्रीटमेंट आज तक नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशसन की ओर से ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं।

केदारनाथ में आपदा से प्रभावित कुंडों के अलावा गौरीकुंड के तप्तकुंड को संजोने के लिए हमारे पास पर्याप्त धन है। कोई तकनीकी सहयोग देने को तैयार नहीं है। इस संबंध में वाडिया संस्थान को कई पत्र भेजने के बाद भी जवाब नहीं आया है। - बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी, बीकेटीसी
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