कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है। बच्चों की पढ़ाई सुचारु करने के लिए ऑनलाइन माध्यम चुना गया, लेकिन यह हर जगह कारगर सिद्ध नहीं हो पाया। दूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेट कनेक्टिविटी नहीं होने से यहां बच्चे पढ़ाई से दूर ही थे। ऐसे में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमी-भैंसारी में तैनात शिक्षिका रचना रावत ने गांव जाकर ही बच्चों को पढ़ाने की ठानी। उनके इस प्रयास की अधिकारियों सहित अभिभावकों व अन्य शिक्षकों ने प्रशंसा की।
वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण बीते सात माह से प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थान बंद पड़े हैं। इस दौरान शिक्षक/शिक्षिकाओं द्वारा छात्र-छात्राओं को नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था कई जगहों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी के बाधित होने कारगर नहीं हो पा रही है। केदारघाटी के राजूहा सेमी-भैंसारी में तैनात गणित-विज्ञान विषय की शिक्षिका रचना रावत ने गांव जाकर ही बच्चों को पढ़ाने की सोची। वह सप्ताह में तीन दिन सेमी और तीन दिन भैंसारी गांव जाकर कक्षा 6 से 8वीं तक के छात्र-छात्राओं को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ा रही हैं। शिक्षिका की इस मुहिम का छात्र-छात्राओं में सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बच्चे नियमित रूप से पढ़ने के लिए उपस्थित हो रहे हैं। अभिभावक महानंद नौटियाल, देवेश्वरी देवी, सरोजनी देवी, विजय सिंह, प्रर्मिला देवी का कहना है कि शिक्षिका के प्रयास से छात्र-छात्राएं पढ़ाई के प्रति गंभीर हो गए हैं। शिक्षिका ने बताया कि वीडियो के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई, लेकिन बच्चों को समझने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए मैंने गांव में जाकर बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसके अभी तक अच्छे परिणाम भी मिले हैं।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमी-भैंसारी में तैनात शिक्षिका रचना रावत गांव में जाकर बच्चों को पढ़ा रही है, जो प्रशंसनीय व प्रेरणादायी है। उनकी पहल से बच्चों को लाभ मिल रहा है। --- रवि कुमार, उप शिक्षाधिकारी ऊखीमठ