वसंत पंचमी पर लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पालिका सभागार में थडिया, चौफला और झुमैला लोकगीतों का परंपरागत वाद्य यंत्रों के साथ गायन किया गया। इस मौके पर ढोल सागर के ज्ञाता देवेंद्र लाल ने ढोलवादन से कार्यक्रम की शुरुआत की और फिर महिला मंगल दल चमराड़ा ने आई फ्चंमी माऊ की बांटी हरियाली जौ की... आदि पारंपरिक गीतों कें साथ ही झुमैला चौफला की शानदार प्रस्तुतियां दी।
ढोलवादक देवेंद्र, दमाऊं पर सोनू व मस्का बाजे पर राजकुमार ने देवी जागर व बसंत के गीत गाए। शिक्षक अतुल चमोली और आरती पुंडीर के शिष्यों ने डौंर थाली का प्रदर्शन किया, जिसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पीपल चौरी से गोलापार्क तक भव्य झांकी के माध्यम से लोगों को वसंत का संदेश दिया। आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि माघ का पूरा मास ही उत्साह देने वाला है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक डा. सुभाष पांडे, मुकेश काला, प्रभाकर बाबूलकर, रंगकर्मी विमल बहुगुणा, शिव प्रसाद नैथानी, सभासद पूजा गौतम, प्रमिला भंडारी, बिष्णुदत्त कुकरेती, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष पीके जोशी, अंजलि खरे, दीपिका भंडारी, वसुधा गौतम, शालिनी बहुगुणा आदि मौजूद थे। दूसरी ओर सरस्वती शिशु विद्यामंदिर श्रीनगर, सरस्वती शिशु विद्यामंदिर श्रीकोट गंगा नाली व रेनबो पब्लिक स्कूल चौरास में मां सरस्वती का जन्म दिन धूमधाम से मनाया गया। विद्यामंदिरों में यज्ञ के साथ ही विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस मौके पर प्रधानाचार्य मदन मोहन नौटियाल, भगवती प्रसाद चमोला आदि मौजूद थे। वहीं गांवों में भी बसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर घरों के मुख्य द्वार पर सुख समृद्धि के लिए जौ की हरियाली लगाई गई। (संवाद)
वसंत पंचमी: दरवाजों पर लगाई जौ, सुख समृद्धि की मनौति मांगी
रुद्रप्रयाग। जनपद के सभी शिक्षण संस्थानों में वसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर स्कूलों में सरस्वती पूजन के साथ रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। लोगों ने भी अपने-अपने घरों में पूजा-अर्चना कर दरवाजों व खिड़की चौखट के दोनों और गाय के गोबर के साथ जौ की पौध लगाते हुए सुख-समृद्घि की मनौति मांगी।
माई गोविंद गिरी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज बेलणी व सरस्वती शिशु मंदिर पुनाड़ में स्कूली बच्चों, शिक्षकों व अभिभावकों द्वारा सरस्वती पूजन व सुंदरकांड का पाठ किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि वसंत पंचमी को श्री पंचमी व ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। पूरे वर्ष को वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर समेत छह ऋतुओं में बांटा गया है। उधर, गुप्तकाशी के एमएल पब्लिक स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर, डा. जैक्सवीन नैशनल पब्लिक स्कूल समेत तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि व जखोली के अलावा पूरी केदारघाटी के शिक्षक संस्थानों में वसंत पंचमी के पर्व पर धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अगस्त्यमुनि में वीरांगना संगठन द्वारा भी गंगा पूजन कर वसंत पंचमी मनाई गई। इस अवसर पर एसएमी अध्यक्ष श्रीकृष्ण सिंह नेगी, चंद्रशेखर पुरोहित, सभासद सुरेंद्र रावत, अंकुर खन्ना, प्रधानाचार्य मनोज कुकरेती, सुनील बमोला, वीरांगना संगठन की अध्यक्ष माधुरी नेगी, सुशीला भंडारी, गीता मलासी समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे। (ब्यूरो)
गीत व कविताओं से किया वसंत ऋतु का स्वागत
रुद्रप्रयाग। वसंत पंचमी के पावन पर्व पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन व कलश संस्था द्वारा काव्य पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें लोककवियों ने गीत-कविताओं से वसंत ऋतु का स्वागत किया।
अपर बाजार स्थित फाउंडेशन के सभागार में आयोजित कविता पाठ का शुभारंभ करते हुए कलश संस्था के संयोजक ओम प्रकाश सेमवाल ने ऋतु वसंत मां ऐजा, खिलीग्यां फूल ऐजा, कविता के जरिए प्रकृति के श्रृंगार को बया किया। जबकि लोककवि जगदंबा चमोला ने वखला का तिर्वाल स्यंटुली पाखर्यूं खुज्याणी छिन, बसंत ऐगे पाड़ मां द्वी चखुली छवीं लगाणी छिन, कविता के जरिए रंग-बिरंगी प्रकृति के सौंदर्य के बारे में बताया। लोक कवयित्रि सुनीता सेमवाल ने अपनी कायरता पर शर्म क्यों नहीं आती मक्कार तुझे, देशभक्ति कविता के जरिए एक पड़ोसी देश की करनी और कथनी को बया किया। इस मौके पर कवयित्री लक्ष्मी बुटोला ने फूल खिल्यां छन डाल्यों पाख्यों, लगणू च ऐगी बसंत, सोनिया ने रोबिन क्या कहता है सुनिएगा, चंद्रशेखर पुरोहित ने जब भी मैं अपने अंदर झांकता हूं, बुराईयों का भंडार देखता हूं और संदीप गढ़वाल ने पूछणा छिन आज भी कनकै गुजारी जिंदगी आदि गीत/कविताओं की प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर करन सिंह, अनूप शुक्ला, सुकांत, कल्पना, सोनिया, शफीक, प्रशांत डोभाल, रिचा, सुरज जग्गी, सुजान सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।
(संवाद)