जलसंस्थान की लापरवाही से छह हजार की आबादी दो माह से पेयजल संकट से जूझ रही है। लोग दूरस्थ स्रोतों से पीने का पानी जुटा रहे हैं। जबकि बारिश के पानी अन्य जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। बावजूद इसके विभागीय स्तर पर योजना के स्थायी मरम्मत के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में लोगों में रोष है।
तहसील मुख्यालय सहित मुख्य बाजार, बस स्टेशन, ओंकारेश्वर मंदिर पैदल मार्ग, गांधीनगर, मस्तोली और बेडूधार में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। पिछले पांच दिनों से पानी के नल सूखे पड़े हैं। स्थानीय निवासी रघुवीर सिंह और बीरपाल सिंह का कहना है कि एक दशक से कस्बे में पिंगलापानी-ऊखीमठ योजना से पेयजल सप्लाई हो रही है।
विभाग की ओर से योजना की नियमित देखरेख नहीं करने से योजना जवाब देने लगी है। गृहणी रेखा रावत ने बताया कि पांच दिन से घर में पानी नहीं आ रहा है। दो किमी दूर से पीने का पानी जुटा रहे हैं। जबकि बारिश के पानी को एकत्रित कर कपड़े व बर्तन धो रहे हैं।
लगातार हो रही बारिश से गाड़-गदेरों के रिचार्ज होने के बाद भी पेयजल संकट बना है। विभागीय अधिकारियों को सूचित करने पर विभाग की ओर से सड़क से लगे घरों को टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है। जबकि सड़क से दूर रह रहे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
जलसंस्थान के ईई सत्येंद्र गुप्ता ने बताया कि ऊखीमठ की पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी मरम्मत की जा रही है। लोगों को नियमित पानी मिले। इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।