साहब, एक चाय के कप से कम कीमत पर कैसे बेच दें माल्टा .. यह शब्द ओरिंग गांव के बुजुर्ग काश्तकार व पूर्व सेनानी अजीत सिंह कंडारी के हैं। कहना है कि सरकार ने पहाड़ के माल्टा को सी श्रेणी में रखा है जिसका मूल्य सिर्फ आठ रुपये किलो तय किया है। उन्होंने सरकार से ए व बी श्रेणी के माल्टा का समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है।
ओरिंग गांव में काश्तकार ने 200 माल्टा के पेड़ों का बगीचा है। काश्तकार द्वारा स्वयं के प्रयासों से अभी जैसे-तैसे 10 क्विंटल तक माल्टा बेचा तो गया है लेकिन अब भी पेड़ों पर 40 क्विंटल माल्टा लदा हुआ है जिसे बंदर व पक्षी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहाड़ी माल्टा का उचित मूल्य तय नहीं किया है, जिससे काश्तकार आहत है। उन्होंने ए और बी श्रेणी में क्रमश: 40 व 35 रुपये किलो समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। कहा कि बिचौलिए बहुत कम मूल्यों में गांवों से माल्टा खरीदकर बाजारों में 10 से 15 गुना अधिक मूल्य पर बेच रहे हैं उन्होंने कहा कि चार फरवरी को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर भीरी में काला फीता बांधकर माल्टा बेचने की चेतावनी दी है। जिला उद्यान अधिकारी योगेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य के हिसाब से माल्टा की खरीद की जा रही है।