आपदा के ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हो पाए हैं। जबकि यहां प्रतिदिन श्रद्धालु गंगा स्नान व पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
16/17 जून 2013 की आपदा में अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम को व्यापक क्षति पहुंची थी। यहां स्नानघाट व सीढ़िय़ां बह गई थी। संगम पर स्थित प्राचीन नारद शिला भी डूब गई थी। बावजूद इसके आज तक यहां पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हो पाए हैं। जबकि यहां पर शाम को नियमित गंगा आरती में शामिल होने के लिए कई श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा के तहत संगम पर सुरक्षा और सुंदरीकरण के लिए मिले 28 लाख रुपये में नगर पालिका ने रास्ता निर्माण पर ही खर्च कर दिया है।
संगम पर सुरक्षा व दोनों नदियों के दोतरफा तेज बहाव से बचने के लिए इंचभर भी काम नहीं किया गया है। गंगा आरती वाले स्थान पर भी खतरा मंडरा रहा है। यहां पुश्ते का एक हिस्सा अंदर से खोखला हो रखा है, जो किसी भी हादसे का कारण बन सकता है। बीते वर्ष 24 मई को संगम पर एक अंत्येष्टी के दौरान दो युवक बह गए थे। उनके शव कई दिन बाद श्रीनगर के निकट पुलिस ने बरामद किए थे।
शासन से मिले 28 लाख रुपये में संगम तक जाने के लिए रास्ता निर्माण किया गया है। संगम पर सुरक्षा के लिए रैलिंग लगाने का काम जल्द किया जाएगा। - राकेश नौटियाल, अध्यक्ष नगर पालिका रुद्रप्रयाग