जोन पांच में चिह्नित होने के कारण जनपद में पुराने सरकारी भवनों को रेट्रोफिटिंग तकनीक से मजबूत किया जाएगा। उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट की टीम इन दिनों जिले में अस्पताल, स्कूल और अन्य सरकारी भवनों का सर्वेक्षण कर रही है। तीनों ब्लाकों में अब तक 54 से अधिक सरकारी भवनों का सर्वेक्षण हो गया है। इसमें कई अति संवेदनशील हैं।
प्रदेश सरकार विश्व बैंक की मदद से यूडीआरपी के साथ प्रदेश स्तर पर पुराने सरकारी भवनों का सर्वेक्षण कर उन्हें रिट्रोफिटिंग से सुदृढ़ करेगी। इससे 6 से 8 रिक्टर स्केल तक भी भूकंप आने से इन भवनों पर कोई असर नहीं पड़ूेगा। इसके अलावा रुद्रप्रयाग जनपद में अन्य प्राकृतिक आपदाओं से भी कई सरकारी भवनों को पूर्व में क्षति पहुंची है, जिससे वे संवेदनशील बने हुए हैं। बीते एक सप्ताह से उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट की छह सदस्यीय टीम के दो-दो इंजीनियर प्रथम चरण में जखोली, रुद्रप्रयाग और ऊखीमठ में सरकारी अस्पताल और स्कूल भवनों का सर्वे कर उनका ब्लू प्रिंट तैयार कर रहे हैं।
60 फीसदी भवन खतरनाक
यूडीआरपी के सर्वे में अब तक देखने में आया है कि कई स्कूल भवनों के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है। बुनियाद बनाने में जहां खानापूर्ति की गई है, वहीं धंसाव जमीन पर भी दोमंजिला भवन तैयार किए गए हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। टीम की मानें तो जिले में 60 फीसदी सरकारी भवन अति संवेदनशील हैं। ऐसे में इनकी रिट्रोफिटिंग सबसे जरूरी है।
प्रारंभिक चरण में सरकारी भवनों के तहत स्कूल व अस्पताल को भूकंपरोधी बनाने के लिए सर्वे किया जा रहा है, जिसके बाद इन भवनों की रिट्रोफिटिंग की जानी है। - मयंक कोटियाल, एई उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट
यूडीआरपी में आपदा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील छह जिलों में रुद्रप्रयाग को भी शामिल किया गया है। यहां सभी पुराने सरकारी भवनों को भूकंप की दृष्टि से अधिक सुरक्षित एवं संरक्षित बनाया जाना है।- आशीष सेमवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी रुद्रप्रयाग