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पानी के लिए दूरस्थ प्राकृतिक स्रोत की दौड़

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जिले के कई गांवों के पेयजल संकट बना हुआ है। महिलाओं का आधा दिन परिवार व मवेशियों के लिए पानी जुटाने में बीत रहा है। महिलाएं तड़के ही दूरस्थ क्षेत्रों में पानी भरने के लिए पहुंच जाती हैं और सिर व पीठ पर पानी ढोना लाती हैं।
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जखोली ब्लॉक के जवाड़ी, दरमोला, स्वीली, सेम, रौंठिया, क्वीलाखाल, घेंघड़खाल के ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं। इन गांवों के लिए वर्षों पूर्व स्वीकृत पेयजल योजनाएं आज तक नहीं बन पाई हैं। पंद्रोला, शीशो, टाट, कुमड़ी सहित अन्य कई गांवों के लिए बनी तैला-सिलगढ़ पेयजल योजना के आए दिन क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को पानी के लिए दूरस्थ स्रोतों की दौड़ लगानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि क्वीलाखाल गांव में अगर छोटा सा आयोजन करना होता है तो ग्रामीणों को डेढ़ से दो सौ रुपये कनस्तर के हिसाब से पानी खरीदना पड़ता है। अगस्त्यमुनि ब्लॉक के तल्लानागपुर पट्टी के बोरा, दुर्गाधार, चोपता में पानी की समस्या लंबे समय से बनी है। यहां भी पानी जुटाने की जिम्मेदारी महिलाओं पर है। इधर, बच्छणस्यूं, रानीगढ़, धनपुर सहित केदारघाटी के कई गांवों में भी महिलाओं को पानी जुटाना पड़ता है। इधर, जलनिगम के अधिशासी अभियंता नवल कुमार ने बताया कि रौंठिया-जवाड़ी पेयजल योजना पर पानी की टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि जून माह से प्रभावित गांवों को पर्याप्त पानी मिलने लगेगा, जिससे ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।
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