मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को बाबा केदारनाथ के द्वार से चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। रुद्रप्रयाग से कांग्रेस की सतत संकल्प यात्रा का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘जनता ने पुन: मौका दिया तो राज्य की तस्वीर बदल दूंगा’।
चुनाव में दल-बदलुओं को करारा सबक सिखाने का आह्वान कर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परंपरा राज्य के विकास के लिए जहर का काम कर रही है, इसे जड़ से खत्म करना होगा। भाजपा और केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के पास उत्तराखंड के लिए कोई विजन नहीं है। केंद्र ने उत्तराखंड का बजट गायब कर दिया। कार्यक्रम में कई घोषणाएं करने के साथ ही कई वायदे भी उन्होंने जनता से किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वर्ष 2020 तक प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य के पास स्थायी रोजगार होगा। वर्ष 2022 तक राज्य में हर हाथ को काम मिल जाएगा। अगले वर्ष तक उत्तराखंड के प्रत्येक पुलिस थाने में एक बेटी सब इंस्पेक्टर और एक बेटी इंस्पेक्टर के पद पर तैनात होगी। श्रीनगर गढ़वाल में जागर महाविद्यालय खोला जाएगा।
जल्द ही प्रदेश में शिल्प संस्थान की भी स्थापना की जाएगी। अगले वर्ष तक स्कूलों में रिक्त शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के सभी पदों को भर दिया जाएगा। 2000 घरों को होम स्टेट योजना से जोड़ा जाएगा, जिसमें रुद्रप्रयाग जनपद के कई गांव शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की भी जमकर तारीफ की। इस दौरान उन्होंने बाजार में जनसंपर्क भी किया। इससे पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप थपलियाल के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने सीएम व प्रदेश अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया।
इस मौके पर थपलियाल ने जिले के विकास के लिए सीएम को 31 सूत्री मांगपत्र भी सौंपा। कार्यक्रम में पूर्व विधायक कुंवर सिंह नेगी, प्रदीप बगवाड़ी, बीरेंद्र बुटोला, राजेंद्र शाह, अंकुर रौथाण, गजेंद्र पंवार, देवेश्वरी नेगी, शैलेंद्र भारती, गणेश सेमवाल, एएस असवाल सहित कई कांग्रेसजन मौजूद थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि बागियों ने देवभूमि पर जो कलंक लगाया है, उसका जवाब रुद्रप्रयाग/केदारनाथ से मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री के लिए आम आदमी की आमदनी भी कालाधन : मुख्यमंत्री
रुद्रप्रयाग। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद कर आम आदमी की आमदनी को भी कालाधन करार दिया है।
जनता परेशान है, लेकिन केंद्र सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता रही है। केंद्र के इस फैसले से विकास योजनाओं पर व्यापक असर पड़ रहा है।