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Rudraprayag News: सड़क, स्वास्थ्य, संचार सेवा से वंचित कालीमठ घाटी का चिलौंड़ गांव

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कालीमठ घाटी के चिलौंड़ गांव में सड़क, स्वास्थ्य और संचार सेवा जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। इस कारण बीते वर्षों में गांव के 32 परिवार पलायन चुके हैं। गांव के लिए डेढ़ दशक पूर्व स्वीकृत दो किमी सड़क अभी तक 100 मीटर भी नहीं बन पाई है।
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ग्राम प्रधान सरिता देवी ने बताया कि कालीमठ घाटी के दूरस्थ गांवों में शामिल चिलौंड में 117 परिवार दर्ज हैं, लेकिन वर्तमान में 80 परिवार ही रहे हैं। पांच-छह वर्षों में 32 परिवार सुविधाओं के अभाव में पलायन कर चुके हैं। पूर्व ग्राम प्रधान मोहन सिंह राणा, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह, कृपाल सिंह, प्रेमा देवी का कहना है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पाई हैं। गांव के लोग आदिकाल में जीने को मजबूर हैं। विधानसभा चुनाव बहिष्कार के बाद भी किसी ने गांव की सुध लेेेना जरूरी नहीं समझा है। गांव में कक्षा आठवीं तक का स्कूल है। नौंवी के पढ़ाई के लिए बच्चों को राजकीय हाईस्कूल जाल मल्ला के लिए 2.5 किमी और इंटर की पढ़ाई के लिए जीआईसी कोटमा के लिए साढ़े चार किमी की दूरी पैदल नापनी पड़ रही है।
दो किमी सड़क के लिए मिला पैसा, 100 मीटर की कटिंग में ही खर्च
वर्ष 2006 में गांव को यातायात से जोड़ने के लिए गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-चौमासी मोटर मार्ग के जाल बैंड से दो किमी सड़क स्वीकृत हुई। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत मार्ग के निर्माण के लिए 33 लाख 66 हजार रुपये भी स्वीकृत हुए, लेकिन पहले वन भूमि के चलते सड़क फाइलों में दबकर रह गई। इसके बाद ग्रामीणों के संघर्ष के बाद वर्ष 2018 में सड़क की सैद्धांतिक स्वीकृत मिली और बाद में वित्तीय स्वीकृति के बाद निर्माण की राह खुुली। वन भूमि हस्तांतरण व वन संपदा क्षतिपूर्ति के बाद वर्ष 2019 में सड़क की कटिंग शुरू की गई, लेकिन 100 मीटर कटान पर ही धनराशि खत्म हो गई। मार्ग पर 36 मीटर स्पान का स्टील गार्डर पुल भी प्रस्तावित है।
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वन भूमि हस्तांतरण, वन संपदा क्षतिपूर्ति की राशि जमा करने के बाद जो धनराशि बची थी, उसमें 100 मीटर तक ही सड़क कटिंग हो पाई है। मार्ग के शुरू के प्वाइंट पर भूस्खलन जोन है, जिसका ट्रीटमेंट भी किया जाना है। दो किमी सड़क निर्माण और प्रस्तावित 36 मीटर स्पान पुल के लिए लगभग साढ़े तीन करोड़ की डीपीआर शासन को भेजी जा रही है। उम्मीद है कि आगामी वित्तीय वर्ष में धनराशि स्वीकृत हो जाएगी, जिसके बाद कार्य प्राथकिता से किया जाएगा।
- मनोज भट्ट, अधिशासी अभियंता लोनिवि ऊखीमठ डिवीजन
गांव में संचार की सुविधा भी नहीं
चिलौड़ गांव के ग्रामीणों को मोबाइल पर बातचीत करने के लिए अपने घरों से दो सौ मीटर ऊपर पहाड़ी पर जाना होता है। गांव में नेटवर्क नहीं आता। इसलिए, स्कूली बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई, इंटरनेट सपने के समान हैं।
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