ऊखीमठ विकासखंड के ग्राम पंचायत मक्कू व उषाड़ा वन पंचायत क्षेत्र में चिह्नित 51 अतिक्रमणकारियों को रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने भूमि खाली करने के आदेश दे दिए हैं। इन अतिक्रमणकारियों ने डीएफओ के आदेश के खिलाफ वन संरक्षक गढ़वाल कार्यालय में अपील की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया है।
पर्यटक स्थल चोपता का काफी हिस्सा रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के अधीन है, जिसमें दुगलबिट्टा, बनियाकुंड, पावधार आदि क्षेत्र शामिल है। यहां लंबे समय से कई लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ था। बीते वर्ष रुद्रप्रयाग वन प्रभाग द्वारा यहां 51 अतिक्रमणकारी चिह्नित कर उन्हें नोटिस थमाए गए थे। अतिक्रमणकारियों ने वन संरक्षक गढ़वाल कार्यालय पौड़ी में अपील करते हुए अपना पक्ष रखा था। मामले में डीएफओ स्तर से की गई कार्रवाई को सही माना गया और अतिक्रमणकारियों को यथाशीघ्र अतिक्रमण की गई भूमि को छोड़ने के निर्देश दिए गए थे। डीएफओ अभिमन्यु ने बताया कि आरक्षित वन क्षेत्र में हुए अतिक्रमण के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। यहां सिविल क्षेत्र में भी काफी अतिक्रमण हुआ है, जिस बारे में प्रशासन को सूचित किया जा चुका है। बताया कि वन संरक्षक गढ़वाल के आदेश पर चिह्नित अतिक्रमणकारियों को भूमि खाली करने के लिए कहा गया है। अगर, ये लोग स्वयं भूमि खाली नहीं करते तो प्रशासन व पुलिस की मदद भी ली जाएगी।
अतिक्रमण रोकने के लिए बनाया जा रहा मास्टर प्लान
डीएफओ अभिमन्यु ने बताया कि पर्यटक स्थल चोपता से लगे आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण को रोकने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य लोगों को रोजगार छीनना नहीं है। बल्कि पर्यावरण और प्रकृति के साथ पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देना है। इसलिए प्रयास किए जा रहे हैं कि इन क्षेत्रों में लोग अतिक्रमण भी न करें और उनकी आजीविका भी चलती रही। इस संबंध में वन संरक्षक गढ़वाल के साथ बैठक में पूरा प्रस्ताव रखा जाएगा।