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पुनाड़ गांव में पांडव नृत्य का शुभारंभ

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जिला मुख्यालय से लगे पुनाड़ गांव में भूमि पूजन और धार्मिक परंपराओं के साथ पांडव नृत्य का शुभारंभ हुआ। 22 दिसंबर तक चलने वाले इस अनुष्ठान में महाभारत कालीन घटनाओं का पंडवाणी गायन और ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडव पश्वाओं के नृत्य के साथ मंचन किया जाएगा।
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पांडव चौक में विधि-विधान के साथ भूमि पूजन किया गया। पंडित कमलेश्वर प्रसाद सेमवाल, दिनेश चंद्र सेमवाल, चंद्रप्रकाश सेमवाल और यमुना प्रसाद सेमवाल ने पंचनाम देवताओं का आह्वान करते हुए पांडवों की पूजा की। समिति के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों ने अनुष्ठान के आयोजन का संकल्प लिया। पांडव नृत्य एवं शिव समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट एवं संरक्षण एमसी डियूंडी ने बताया कि एक दिसंबर से अस्त्र-शस्त्रों के साथ पांडव नृत्य शुरू होगा। 19 दिसंबर को गैंडा कौथिग, 21 को हाथी कौथिग, 22 को मोरी डाली कौथिग का मंचन किया जाएगा। इस मौके पर रामचंद्र नौटियाल, दिगंबर प्रसाद सेमवाल, विजय कप्रवाण, प्रकाश भारती, विनोद भारती, धर्म सिंह, विक्रम कप्रवाण, संजय पंवार और कालिका सेमवाल आदि मौजूद थे। उधर, जखोली ब्लाक के दरमोला गांव में पांडव नृत्य देखने के लिए भरदार पट्टी के गांवों के सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, मद्महेश्वर घाटी के रांसी गांव में 15 वर्ष के बाद हो रहे पांडव नृत्य को लेकर लोगों उत्साह बना है।
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