बुधवार प्रात: मवाण गांव से पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ अकलनंदा नदी के तट प्रयाग स्नान किया। यहां पर पांडवों ने पित्रों को पिंडदान किया। इसके बाद वे पुन: मंडाण स्थल पर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना के उपरांत पांडव नृत्य में महाभारत युद्ध के विभिन्न लीलाओं का पश्वाओं ने पंडवाणी गायन में मंचन किया। इसके बाद मोरू की डाली का विसर्जन के साथ वाणों को विधि-विधान के साथ अंदर रखा गया।
समापर पर बतौर मुख्य अतिथि भाजपा के जिलाध्यक्ष डा. आनंद सिंह बोहरा व वरिष्ठ नेता भरत सिंह चौधरी ने कहा कि पांडवों ने जिस तरह कष्टों को सहते हुए धर्म की रक्षा की, वह सबके के लिए प्रेरणा है। उन्होंने नई पीढ़ी से अपनी धार्मिक, सास्कृतिक व सामाजिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार व संवर्द्धन के लिए सक्रिय होकर काम करने का आह्वान किया। इस मौके पर आयोजन समिति के रघुवीर सिंह राणा ने सफल आयोजन के लिए ग्रामीणों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। इधर, नगर से लगे पुनाड़ गांव में आयोजित पांडव लीला के 14 वें दिन पांडवों ने यहां अलजकनंदा नदी पर स्नान किया।
ग्राम पंचायत कुरछोला में चल रहे पांडव नृत्य के तहत चक्रव्यूह व कमलव्यूह का मंचन किया जाएगा। कुरछोला की प्रधान गीता देवी रावत ने बताया कि पांडव नृत्य के दौरान 25 दिसंबर को चक्रव्यूह व 27 दिसंबर को कमलव्यूह का मंचन होगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए पूरी तैयारियां कर दी गई है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से चक्रव्यूह व कमलव्यूह मंचन में शामिल होने की अपील की है।