जखोली विकासखंड के सौंदा भरदार गांव निवासी रमेश सिंह अपने जन्म से दिव्यांग बच्चे के इलाज के लिए दर-दर भटक रहा है। गरीबी के चलते वह अपने पाल्य का उपचार नहीं करा पा रहा है। वहीं इस परिवार व दिव्यांग को शासन की ओर से संचालित एक भी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
प्रदेश सरकार भले ही निराश्रित व गरीबों की मदद के लिए कई योजनाएं संचालित होने की बात कह रही हो, लेकिन इन योजनाओं का गरीब व जरूरतमंद को कितना लाभ मिलता है, इसकी बानगी सौंदा गांव के रमेश सिंह से बेहतर कोई नहीं बता सकता। बीपीएल कार्ड धारक रमेश किसी दुकान में काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। इंदिरा आवास के लिए कई बार आवेदन के बाद भी सुध नहीं ली जा रही है।
रमेश का आठ वर्षीय पुत्र सुनील जन्म से दिव्यांग है। उसके उपचार व अन्य सुविधा के लिए बच्चे के पिता ने अधिकारियों से गुहार भी लगाई, लेकिन किसी ने नहीं हुई। जबकि 18 वर्ष से कम उम्र के दिव्यागों को 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। बावजूद सुनील की सुध कोई नहीं ले रहा है। इधर, जिला पंचायत सदस्य आशा डिमरी ने भी दिव्यांग बच्चे को सरकारी मदद देने की मांग की है।
विभागीय सर्वे और परिजनों के आवेदन के बाद ही जरूरतमंदों को योजनाओं के लिए पात्र चुना जाता है। सौंदा में दिव्यांग के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अगर, इस संबंध में आवेदन आता है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेंद्र लाल, जिला समाजकल्याण अधिकारी, रुद्रप्रयाग