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धरातल पर नहीं उतर पाया रोपवे निर्माण

Wed, 16 Mar 2016 08:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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केदारनाथ यात्रा को सुलभ और सरल बनाने के मकसद से स्वीकृत रामबाड़ा-केदारनाथ रोपवे एक दशक बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाया है। जबकि 2009 में यूडेक और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने इसके निर्माण के लिए टेंडर भी आमंत्रित किए थे। आपदा के बाद से मुख्यमंत्री हरीश रावत भी रोपवे निर्माण के बारे में कई बार घोषणा कर चुके हैं।  
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भगवान आशुतोष के 11वें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को जून 2013 से पहले गौरीकुंड से केदारनाथ तक 14 किमी की खढ़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। आपदा के बाद बढ़कर 16 किमी हो गई है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से रामबाड़ा से धाम तक का रास्ता तय करना मुश्किल भरा होता है। इसके निस्तारण के लिए वर्ष 2005 में रामबाड़ा से केदारनाथ तक रोपवे निर्माण की स्वीकृति मिली थी। यूडेक (उत्तरांचल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कंपनी) ने योजना का सर्वेक्षण तथा फिजीबिलिटी टेस्ट किया, जिसके बाद करीब 3.50 किमी लंबे रोपवे की अनुमानित लागत करीब 70 करोड़ रुपये आंकी गई थी।


तत्कालीन प्रदेश सरकार ने तब योजना का निर्माण पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप)में कराने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2009 में टेंडर भी आमंत्रित किए गए, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इससे यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 16/17 जून 2013 की आपदा के बाद से प्रदेश सरकार को फिर रोपवे की याद आई है। फरवरी 2014 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से सीएम रावत केदारघाटी के अपने हर दौरे में रामबाड़ा-केदारनाथ रोपवे के निर्माण की बात कह चुके हैं। यही नहीं, मुख्य सचिव रहते हुए मुख्यमंत्री के प्रधान मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने अक्तूबर 2015 से रोपवे निर्माण की बात भी कही थी। अब छह माह बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
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रामबाड़ा-केदारनाथ रोपवे को लेकर अब तक शासन स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्राथमिकता धाम के पुनर्निर्माण कार्यों को पूरा करने की है। चरणबद्ध तरीके से सभी प्रस्तावित कार्य किए जाएंगे।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
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