केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय का परिसर वाहनों की पार्किंग और बैडमिंटन कोर्ट बनकर रह गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों को कई बार बुखार की दवा भी नसीब नहीं हो रही है, जबकि आपदा के चलते राहत व बचाव अभियान में यह अस्पताल मुख्य केंद्र बनकर उभरा था। तब, तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण की घोषणा भी की थी, लेकिन सात वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस बनी है।
टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष राय सिंह राणा, व्यापार संघ अध्यक्ष अनसूया प्रसाद भट्ट, पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल, पूर्व ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल, महेश सेमवाल का कहना है कि केदारनाथ आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान में अस्पताल को मुख्य रेस्क्यू सेंटर के रूप में संचालित किया गया था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व हरीश रावत के अलावा स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने अस्पताल के उच्चीकरण की घोषणा की थी। उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती और इमरजेंसी सेवा मुहैया कराने की बात भी कही थी, लेकिन सात वर्ष बीतने के बाद भी स्थिति जस के तस है।