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मयंक हत्याकांड : मुख्य सूत्रधार सहित दो आरोपी गिरफ्तार

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गदरपुर में मयंक हत्याकांड का खुलासा करते एसएसपी एवं पीछे खड़े आरोपी। - फोटो : RUDRAPUR
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गदरपुर। तीन दिन पूर्व यूपी पुलिस के सिपाही मयंक कटारिया की हत्या के मामले में पुलिस ने दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। आरोपियों के कब्जे से असलहा बरामद नहीं हुआ है। मामले में दो नामजद सहित चार अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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थाना परिसर में शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए घटना को जमीनी विवाद और वर्चस्व की लड़ाई से जोड़ा है। बताया कि वर्ष 2005 में ग्राम चंदेला निवासी जनार्दन दुबे ने अपनी पट्टे की डेढ़ एकड़ जमीन को ढाई लाख रुपये में रामपुर जिले के कोतवाली बिलासपुर क्षेत्र के ग्राम चंदेला निवासी मयंक सिंह (27) के पिता दयानंद को बेची थी।
पट्टे की जमीन को बेचा नहीं जा सकता था। जनार्दन दुबे की पत्नी कांति देवी ने कोर्ट केस कर दो महीने पहले जमीन को वापस ले लिया था। जनार्दन के भतीजे मनोज दुबे ने जमीन पर कब्जा लेते समय ग्राम रजपुरा गदरपुर निवासी उदयवीर सिंह उर्फ सनी विर्क को मौके पर बुलाया था। मयंक के परिजनों ने जमीन पर प्लाटिंग की थी। जमीन को खाली करने के लिए विभिन्न माध्यमों से मनोज पर दबाव बनाए जाने के साथ ही उदयवीर को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने पर धमकियां मिली थीं।
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उदयवीर ने मनोज के अलावा गौरव उर्फ निक्का निवासी वार्ड नंबर पांच एवं बलजीत सिंह उर्फ जोत को धमकियों की जानकारी दी थी। 12 अगस्त को मनोज दुबे ने उक्त लोगों को बताया कि मयंक अपने दोस्तों के साथ मिलकर उनकी हत्या कर सकता है।
इस पर गौरव ने दोस्तों के साथ वीडियो वायरल कर मयंक को उसके गांव में आकर मारने की धमकी दी थी। फेसबुक पर वीडियो के वायरल होने पर मयंक ने अपने दोस्त संदीप सिंह उर्फ बंटी एवं शेरा निवासी पछियापुर को इस बारे में बताया था।
13 अगस्त को विवाद सुलझाने के लिए रखी गई बैठक नहीं हो पाई थी। इसी दिन शाम चार बजे दोनों पक्षों के लोगों का गूलरभोज रोड में आमना-सामना हुआ था, तब भविष्य में एक-दूसरे से विवाद न करने का मौखिक समझौता हुआ था। इसके बाद रात आठ बजे मयंक कटारिया अपने साथी संदीप सिंह, रविंद्र सिंह, मिन्टा और प्रदीप सिंह के साथ खालसा ढाबे पर खाना खाने पहुंचा। इसी बीच मनोज दुबे ने अपने साथी उदयवीर सिंह, बलजीत सिंह, गौरव और कुछ अन्य लोगों को बुलाया और शराब पिलाई।
इसके बाद साजिश के तहत उनको उकसाकर खालसा ढाबे में खाना खा रहे मयंक की गोली मारकर हत्या करवा दी और मौके से फरार हो गए। एसएसपी ने बताया कि पुलिस और एसओजी की टीम ने 15 अगस्त को मनोज दुबे को ग्राम रतनपुरा स्थित आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर और बलजीत सिंह उर्फ जोत को चीनी मिल रोड गदरपुर से गिरफ्तार किया था। हत्या में शामिल उदयवीर सिंह, गौरव उर्फ निक्का, एक नकाबपोश और अज्ञात को गिरफ्तार करने के लिए दबिशें दी जा रही हैं। वहां पर एएसपी काशीपुर डॉ. जगदीश चंद मौजूद थे।
मनोज और बलजीत पर दर्ज हैं कई आपराधिक केस
गदरपुर। मयंक हत्याकांड के सूत्रधार मनोज दुबे पर थाना बिलासपुर में चार मुकदमे दर्ज हैं। इनमें जानलेवा हमले, आर्म्स एक्ट, फारेस्ट एक्ट के मुकदमे शामिल हैं। वहीं, बलजीत सिंह उर्फ जोत के खिलाफ गदरपुर एवं केलाखेड़ा में जानलेवा हमला, बलवे सहित विभिन्न धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हैं।
सोशल मीडिया वायरल हुआ हत्या का लाइव वीडियो
गदरपुर। यूपी पुलिस के सिपाही मयंक की हत्या का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसमें हत्यारे मयंक को गोली मारते हुए कैद हुए थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ली थी और मीडिया से भी फुटेज साझा नहीं किए थे। लेकिन एक दिन बाद ही यह फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इससे पुलिस की जमकर किरकिरी हुई थी।
पुलिस की कार्रवाई से मृतक के ताऊ असंतुष्ट
गदरपुर। पुराने जमीनी विवाद और वर्चस्व की लड़ाई को वजह बताते हुए पुलिस ने भले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर खुलासा किया हो लेकिन मृतक के परिजन पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट हैं। मृतक के ताऊ भूप सिंह पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित साजिश बता रहे हैं। उन्होंने मयंक के साथियों की भूमिका को भी संदिग्ध बताया।
उनका कहना था कि हमलावरों के खुलेआम हथियार लेकर ढाबे में आने के बाद भी मयंक के साथी बेफिक्र होकर इधर-उधर घूम रहे थे। इसके चलते एक नकाबपोश हमलावर ने मयंक को गोली मार दी। पुलिस ने महज खानापूर्ति करके हत्याकांड का खुलासा किया है। अभी पूरे मामले की और गहराई से जांच की जरूरत है।
सच निकली फेसबुक पर विवाद की आशंका
गदरपुर। सिपाही मयंक सिंह की गोली मारकर की गई हत्या के मामले में फेसबुक पर अपलोड की गई पोस्ट को लेकर हुए विवाद की आशंका सच साबित हुई। अमर उजाला ने अपनेे 14 अगस्त के अंक में ‘फेसबुक पर पोस्ट का विवाद तो नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। परिजनों ने जमीनी विवाद को लेकर हत्या की आशंका जताई गई थी। सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में फेसबुक पर वायरल हुई पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया। अमर उजाला ने अपने 15 अगस्त के अंक में ‘ फेसबुक पर पहुंची जमीन की लड़ाई, पंचायत में कत्ल से हुआ फैसला’ शीर्षक से पूरे मामले के पीछे सच्चाई को साफ कर दिया था।
खुलासा करने वाली टीम
सीओ बाजपुर कमला बिष्ट, एसओजी प्रभारी तुषार बोरा, एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह, एसओ जसविंदर सिंह, एसआई मदन सिंह बिष्ट, विनोद जोशी, विनय मित्तल, गणेश दत्त भट्ट, योगेश कुमार, ललित बिष्ट, कांस्टेबल राजेश यादव, तारादत्त पंत, जीवन कुमार, सुरेंद्र सिंह, पारस पाल, संगीता आर्या, हीरा रावत, बलवंत सिंह, विरेंद्र चौहान और गुरवंत सिंह।
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