राज्य निर्माण के बाद भी कई गांव सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। कुछ गांवों के लिए सड़कें स्वीकृत भी हुई, लेकिन वे धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। इसकी बानगी ऊखीमठ तहसील में देखने को मिल रही है। यहां पठाली, डुंगर-सेमला सहित आठ से अधिक गांवों के लिए 18 वर्ष पहले सड़क स्वीकृत हुई थी, अब तक इसका निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसे में ग्रामीणों को तहसील व ब्लाक मुख्यालय ऊखीमठ तक पहुंचने के लिए मीलों अतिरिक्त फेर लगाना पड़ रहा है।
वर्ष 1997-98 में यूपी शासन में ऊखीमठ के दूरस्थ गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए लगभग 10 किमी पठाली-पलद्वाड़ी मार्ग स्वीकृत किया गया था। मार्ग से पठाली, भींगी, उथींड, मक्कू और पावजगपुरा ग्राम पंचायतों की करीब चार हजार से अधिक आबादी को लाभ मिलना था। लोनिवि ने सड़क निर्माण शुरू किया, लेकिन 18 वर्षों में सड़क ढाई किमी सेमला-डुंगर तक ही बन पाया है। इस पर भी सिर्फ हिल कटिंग ही की गई है। इस सड़क से भींगी, उथिंड, मक्कू, पाव जगपुड़ा और परकंडी गांवों को लाभ मिलना था।
सड़क के अभाव में ग्रामीणों को ऊखीमठ पहुंचने के लिए 20 से 32 किमी की दूरी नापनी पड़ती है। जबकि सड़क बनने से दूरी 5 से 13 किमी रह जाती। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य संपत्ति देवी का कहना है कि शासन-प्रशासन को लगातार अवगत कराने के बाद भी सड़क नहीं बन रही है। सड़क लंबित होने के कारणों की भी जानकारी नहीं दी जा रही है। इधर, ग्राम पंचायत मक्कू की ग्राम प्रधान सरस्वती देवी व भींगी के ग्राम प्रधान शिव सिंह का कहना है कि मार्ग बनता तो, उन्हें मीलों के अतिरिक्त सफर से निजात मिलती।
सेंचुरी एरिया के कारण मार्ग निर्माण में दिक्कतें आ रही थी। अब शासन स्तर से स्वीकृति मिल गई है। सेमल-डुंगरा तक सड़क ठीक की जा रही है। आगे का निर्माण कार्य अप्रैल माह से शुरू होगा।- मनोज दास, ईई लोनिवि ऊखीमठ