99 मेगावाट की सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना ने मंदाकिनी नदी के अस्तित्व पर संकट ला दिया है। इन दिनों कुंड से बेडूबगड़ तक नदी सूखी पड़ी है, जिस कारण जलीय परिस्थिकीय तंत्र पूरी तरह गड़बड़ा गया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों ने परियोजना की कार्यदायी संस्था से नदी का नियमित बहाव बनाए रखने की मांग की है।
बीते वर्ष जुलाई से सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। यहां 33-33 मेगावाट की तीन टरबाइन लगी हैं, जिसके लिए 12 किमी लंबी टनल से पानी पहुंच रहा है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर कुंड में परियोजना की बैराज बनाई गई है। साथ ही यहां से बेडूबगड़ तक 12 किमी लंबी टनल है, जिस कारण पानी पावर हाउस तक पहुंच रहा है। ऐसे में नदी का बहाव भी प्रभावित हो रहा है। इन दिनों कुंड से बेडूबगड़ तक नदी सूखी पड़ी है। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह कंडारी, पूर्व ग्राम प्रधान विश्वनाथ, पंडित सिद्धेश्वर भट्ट आदि का कहना है कि बैराज का पानी बढ़ाने के लिए बार-बार नदी का बहाव रोका जा रहा है, जिससे दिक्कतें हो रही हैं। पानी रोकने से 12 किमी क्षेत्र में नदी सूखने से छोटी-बड़ी मछलियों के साथ ही अन्य जलीय जीव मर रहे हैं। उन्होंने परियोजना की निर्माणदायी कंपनी एलएडंटी से मंदाकिनी नदी का बहाव नियमित रखने की मांग की है। संवाद