गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान की ओर से सरल ग्रामीण तकनीक के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर गांवों में सीमित उपलब्ध संसाधनों के जरिए आजीविका के नए विकल्पों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए जिपं अध्यक्ष अमरदेई शाह ने कहा कि किसी भी देश के सामाजिक व सांस्कृतिक विकास में गांवों की अहम भूमिका होती है। इसलिए ग्रामीणों को नकदी फसलों, जड़ी-बूटी उत्पादन, मौन पालन, मत्स्य पालन, फल व फूलोत्पादन के लिए प्रेरित करना होगा। साथ ही ग्रामीणों की ओर से उत्पादित उत्पादों को बाजार भी मुहैया करना होगा। संस्थान के प्रभारी डा. आरके मैखुरी ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार के लिए प्रेरित करना है। संस्थान के विशेषज्ञों ने महिलाओं को बहुपयोगी पेड़-पौधों की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी और पौधारोपण कर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने, जैविक व प्राकृतिक संसाधनों के प्रसंस्करण से खाद तैयार करने, मौसमी व बेमौसमी खेती आदि के बारे में बताया। इस अवसर पर हयात सिंह राणा, सुधांशु चमोली, ताबजर बिष्ट, रजनीश समेत ग्रामीण महिलाएं व काश्तकार मौजूद थे।