प्रकृति की नेमतों को संजोए बुग्यालों के बीच स्थित पर्यटक स्थल चोपता में जरूरी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। रात को रोशनी के लिए आज भी छिल्ले की रोशनी का सहारा है। जबकि पानी, साफ-सफाई और शौचालय व्यवस्था दम तोड़ रही हैं। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
ऊखीमठ-गोपेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तहसील मुख्यालय से करीब 30 किमी की दूरी पर स्थित चोपता की प्राकृतिक सुंदरता देखते बनती है। चोपता बांज, बुरांश के घने जंगल के बीच स्थित है। यह स्थान पर्यटकों को बारामास अपनी ओर आकर्षित करता है। इन दिनों चारों तरफ खिले बुरांश के लाल, गुलाबी फूल यहां की सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं। ऐसे में प्रतिदिन काफी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। समीप ही दुगलबिट्टा और बनियाकुंड बुग्याली हैं। होटल व्यवसायी बिजेंद्र राणा व दिनेश भंडारी का कहना है कि 20 से अधिक दुकानें/ढाबा और लॉज मौजूद हैं, लेकिन बिजली, पानी, शौचालय और साफ-सफाई की कोई सुविधा नहीं है। जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है।
तीन किमी दूर से जुटा रहे पानी
ऊखीमठ। बुग्याली क्षेत्र मरचूला से चोपता के लिए निर्मित पेयजल योजना का स्रोत इस वर्ष सूखने से पेयजल संकट हो गया है। ऐसे में लोगों को तीन किमी दूर भुनकुन से वाहनों की मदद से पानी जुटाना पड़ रहा है।
छिल्ले की रोशनी से गुजरती रात
पर्यटक स्थल चोपता का अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। यहां आज भी छिल्ले की रोशनी में रात गुजारनी होती है। ऊर्जा निगम के एसडीओ अर्चित भंडारी ने बताया कि चोपता, बनियाकुंड से तुंगनाथ तक विद्युतीकरण के लिए बीते वर्ष 1 करोड़, 37 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
प्रतिदिन पहुंच रहे सैकड़ों पर्यटक
इन दिनों चोपता में प्रतिदिन 6 से 7 सौ पर्यटक पहुंच रहे हैं। सर्दियों में भी बर्फबारी का लुफ्त लेने यहां खासी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यहां से द्वितीय केदार श्रीतुंगनाथ धाम की दूरी मात्र 3.50 किमी है। वन विभाग की मानें तो सीजन में प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार पर्यटक चोपता, दुगलबिट्टा व तुंगनाथ पहुंचते हैं।
अवस्थापना विकास मद के तहत पर्यटक स्थल चोपता में जरूरी संसाधन को उपलब्ध कराया जाना है। इसके लिए प्रारंभिक सर्वे हो चुका है। जल्द ही कार्ययोजना तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।- पीके गौतम, जिला पर्यटन अधिकारी, रुद्रप्रयाग