नारायणकोटी मंदिर समूह की उचित देखरेख एवं प्रचार-प्रसार से यह स्थानीय लोगों के लिए वर्षभर रोजगार का साधन बन सकता है।
जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर नारायणकोटी मंदिर समूह प्राचीन शिल्पकला का अद्भुत नमूना है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन इसकी सुध नहीं ले रहा है। नतीजन वर्तमान में 360 छोटे-छोटे मंदिरों के इस समूह में से मात्र 20 मंदिर ही बचे हुए हैं। पुरातत्व विभाग ने मंदिर समूह को संरक्षित की श्रेणी रखा है, लेकिन विभाग ने भी केवल बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर दी है।
केदारखंड में वर्णित है कि नारायणकोटी में 360 मंदिरों का समूह था। इनमें से कई मंदिर भूकंप व भूस्खलन से जमींदोज हो गए। वर्तमान में केवल नवग्रह मंदिर, लक्ष्मीनारायण, वीरभद्र, सत्यनारायण सहित बीस मंदिर ही बचे हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता लखपत सिंह राणा का कहना है कि नारायणकोटी मंदिर समूह प्राचीन व आकर्षक है। प्रचार-प्रसार व रखरखाव के अभाव में तीर्थयात्री इससे अनभिज्ञ हैं।
गढ़वाल मंडल में 35 मठ-मंदिर के संरक्षण का जिम्मा विभाग के पास है। शासन से इसके एवज में वर्ष भर में मात्र पांच से सात लाख रुपये ही मिलते हैं। ऐसे में बजट के अभाव के कारण नारायणकोटी मंदिर समूह के संरक्षण व उचित प्रचार-प्रसार में दिक्कतें आ रही हैं।
- अनिल नेगी, अनुश्रवण सहायक भारतीय पुरातत्व विभाग पौड़ी।