मौसम की बेरूखी का असर केदारनाथ, मद्महेश्ववर व तुंगनाथ तक नजर आने लगा है। चारों तरफ पहाड़ियां बर्फविहीन हो रखी है, जिससे यहां दिन में पारा 15 से 20 डिग्री तक पहुंचने लगा है। कम बर्फबारी के कारण बुग्यालों में भी नमी घट रही है।
बीते वर्ष बरसात के बाद से अभी तक बमुश्किल से 105 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश से लगभग 85 फीसदी कम है। आंकड़ों पर गौर करें तो केदारनाथ में पूरे सर्दियों में सिर्फ 21 फीट बर्फबारी हुई है। केदारपुरी क्षेत्र में जहां धूप नहीं पहुंचती है, वहां भी आधा फीट ही बर्फ है। चोपता बुग्याल भी बर्फ विहीन हो रखा है। तृतीय केदार तुंगनाथ से चंद्रशिला तक बहुत कर्म बर्फ है, जबकि बीते वर्ष यहां अप्रैल-मई तक तीन फीट बर्फ थी। केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों से जुड़े मनोज सेमवाल ने बताया कि बीते सात वर्षों में यह पहला मौका है, जब धाम में मार्च से ही तापमान बढ़ने लगा है। साथ ही मंदिर क्षेत्र में बर्फ बहुत कम है।
68 फीट बर्फ गिरी थी केदारनाथ में
रुद्रप्रयाग। वर्ष 2018/19 में यहां पूरे सीजन में 68 फीट से अधिक बर्फ गिरी थी। स्थिति यह रही कि 9 मई 2019 को कपाटोद्घाटन पर भी यहां सात फीट से अधिक बर्फ मौजूद थी, जबकि पूरे यात्राकाल में पैदल मार्ग पर छह जगहों पर 20 से 25 फीट लंबाई व ऊंचाई में हिमखंड मौजूद थे।
तीन दिन पूर्व तुंगनाथ में दिन का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो उच्च हिमालय क्षेत्र के लिए शुभ नहीं हैं। सर्दियों में बारिश व बर्फबारी सामान्य से भी बहुत कम हुई है। प्राकृतिक स्रोतों पर भी पानी कम होने से पेयजल संकट भी बढ़ रहा है।
- विजयकांत पुरोहित, वरिष्ठ वैज्ञानिक, हैप्रेक, गढ़वाल विवि