केदारनाथ में पानी का भारी से भारी जलजला भी अब मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। मंदिर की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय दीवार के तहत 350 मीटर लंबी आरसीसी दीवार का निर्माण कार्य अगले 15 दिन में पूरा हो जाएगा।
मार्च 2014 से केदारनाथ के पुनर्निर्माण का कार्य कर रहे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) मंदिर और केदारपुरी की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवारों का निर्माण कार्य कर रहा है। मंदिर से दो सौ मीटर पीछे बनाई जा रही आरसीसी दीवार का निर्माण जोरों पर है।
छह मीटर ऊंची और 350 मीटर लंबी यह दीवार 325 मीटर तक बन गई है। बुनियाद से लेकर पूरे छह मीटर की ऊंचाई तक सरिया के जाल को पत्थर और सीसी से भरा जा रहा है। दीवार निर्माण के साथ किनारे से पैदल रास्ते का निर्माण कर उस पर टाइल्स भी लगाई जा रही है। इससे मंदिर से चार सौ और छह सौ मीटर आगे इटली की तकनीक के आधार पर रॉक नेट वॉल और गेविल वॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। इन दीवारों की ऊंचाई और लंबाई भी आरसीसी सुरक्षा दीवार के समान है।
27 भवनों का निर्माण जोरों पर
केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों के लिए बनाए जा रहे भवनों का कार्य भी जोरों पर है। पहले चरण में 43 भवनों का कार्य होना है, जिसमें 27 का कार्य अंतिम दौर में है। कई भवनों में बिजली व पेयजल लाइन की फिटिंग का कार्य पूरा हो चुका है। धाम में 111 तीर्थ पुरोहितों के लिए भवन बनाए जाने हैं।
पूरा होने को स्नान घाट
मंदाकिनी व सरस्वती नदी के संगम पर बन रहा स्नान घाट का निर्माण 15 सितंबर तक पूरा हो जाएगा। करीब दो सौ मीटर लंबे इस घाट में एक समय में एक हजार लोग स्नान कर सकेेंगे। इसके अलावा इन दिनों मंदाकिनी नदी किनारे रास्ते से लगे भारी बोल्डरों को भी तोड़ दिया गया है।
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त्रिस्तरीय दीवार के तहत बन रही आरसीसी दीवार लगभग पूरी हो चुकी है। 30 मीटर कार्य शेष रह गया है। विशेषज्ञों की राय और देखरेख में बन रही यह दीवार किसी भी विषम हालात में मंदिर तक मलबा व पानी नहीं घुसने देगी। इस दीवार से पहले रॉकनेट वॉल और गेविन वॉल भी हैं।
-- कर्नल अजय कोठियाल
प्राचार्य, निम