जंगल की आग और शुष्क मौसम की मार का असर काफल जैसे औषधीय गुणवाले जंगली फलों पर भी पड़ा है। पादप जगत में महारिकेसी कुल के नाम से जाना जाने वाले काफल का वानस्पतिक नाम मिरीका नॉगी है। काफल में 40 फीसदी रस की मात्रा होती है। अप्रैल से जून तक यह फल कई गांवों में लोगों की आर्थिकी का साधन भी बनता है।
बच्छणस्यूं और धनपर के राम सिंह और राजे सिंह का कहना है कि इस बार काफल अत्यधिक मात्रा में थे, लेकिन मार्च-अप्रैल में बारिश नहीं होने और जंगल की आग से यह फल निचले इलाकों में खत्म हो गया। ऊपरी बांज-बुरांश के जंगलों में भी सूखेपन से इसमें रस बहुत कम रह गया। काफल में कई औषधीय गुण हैं।
इसमें विटामीन सहित आयरन और मैग्निशियम पाया जाता है। साथ ही प्रोटीन, कैल्शियम और पोटैशियम की मात्रा भी होती है। काफल पेट में गैस सहित दांतों की बीमारी को भी जड़ से मिटाता है।