लद्दाख क्षेत्र में पेट्रोलिंग के दौरान ग्राम गौरीकला निवासी गोरखा रेजीमेंट के जवान देव बहादुर शहीद हो गए। देव चार साल पहले ही गोरखा रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। शहीद के भाई के अनुसार जमीन में बिछी माइन में हुए विस्फोट की चपेट में आकर उनका भाई शहीद हुआ है।
जवान के शहीद होने की सूचना से परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं, क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद के घर पर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लग गया। शहीद का शव देर शाम घर पहुंचने की संभावना है और सोमवार को उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
क्षेत्र के ग्राम गौरीकला में शेर बहादुर अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं। बड़ा बेटा किशन बहादुर ग्वालियर में आर्मी में तैनात है। दूसरे नंबर का बेटा देव बहादुर (24) वर्ष 2016 में गोरखा रेजीमेंट में भर्ती होने के बाद वर्तमान में लद्दाख में तैनात था।
शनिवार की देर रात देव बहादुर के एक हादसे का शिकार होने की सूचना परिजनों को ग्राम प्रधान लक्ष्मी यादव से मिली। इस पर परिजन रातभर देव बहादुर का हाल जानने के लिए परेशान रहे और ग्वालियर में तैनात किशन से बात की।
इसके बाद किशन रात में ही किराये पर कार लेकर रवाना हुआ और रविवार सुबह अपने घर गौरीकला पहुंच गया। सेना के अधिकारियों से जानकारी लेने पर देव बहादुर के शहीद होने की जानकारी मिली तो परिजन बिलख पड़े। देव बहादुर ने भर्ती के बाद हिमाचल प्रदेश के सुबाथू में अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी।
इसके बाद उनकी तैनाती कारगिल में हुई थी। चार महीने कारगिल में रहने के बाद उसका तबादला झारखंड हो गया था। करीब ढाई महीने पहले चीन से तनातनी के बाद देव बहादुर को लद्दाख भेजा गया था। शहीद के भाई किशन ने बताया कि दुर्घटना की सूचना शनिवार रात बनबसा आर्मी कैंप को दी गई थी। वहां से किच्छा कोतवाली और ग्राम प्रधान के माध्यम से परिजनों को सूचना मिली। देर शाम या सोमवार सुबह शहीद की पार्थिव देह घर पहुंचने की संभावना है।
बचपन से ही था देश सेवा का जुनून
लालपुर। देव बहादुर को बचपन से ही देश की सेवा करने का जुनून था। उन्होंने अपने गांव के पास स्थित कनकपुर इंटर कॉलेज से हाईस्कूल, ग्राम चुकटी देवरिया स्थित इंटर कॉलेज से इंटर और रुद्रपुर डिग्री कॉलेज से बीए किया था। इस दौरान वह फौज में जाने की तैयारी भी करते रहे। वर्ष 2016 में गोरखा रेजीमेंट में भर्ती के बाद उनका फौज में जाने का सपना पूरा हुआ। देव के बड़ा भाई किशन बहादुर भी आर्मी में 2014 में भर्ती हो गए थे।
शुक्रवार को अंतिम बार बात हुई थी परिजनों
लालपुर। शहीद देव बहादुर की परिजनों से अंतिम बार बातचीत शुक्रवार रात को वीडियो कॉल के जरिये हुई थी। देव ने अपनी मां लक्ष्मी देवी और बहन गीता से नवंबर में आने की बात कही थी। पिता शेर बहादुर ने बताया कि देव ने कहा था कि उन्हें ड्यूटी के लिए एक टापू पर भेजा जा रहा था। अब मोबाइल पर कॉल मत करना, क्योंकि वहां पर नेटवर्क नहीं होता है।
बताया कि वे देव की शादी कराने के लिए एक लड़की भी देख रखी थी लेकिन देव को इसकी जानकारी नहीं थी। वह नवंबर में आता तो तब उसे बताते। शेर बहादुर ने बताया कि बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है। उनका छोटा बेटा बेरोजगार है। वह चाहते हैं कि छोटा बेटा भी फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करे।
संगीत और कबड्डी के शौकीन थे देव
लालपुर। शहीद देव बहादुर को कबड्डी और संगीत का शौक था। पिता शेर बहादुर ने बताया कि कबड्डी की कई बड़ी प्रतियोगिताओं में उसने हिस्सा लिया था। इसके अलावा उसे संगीत सुनना भी पसंद था। कहा कि बेटे ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर की है। देश के लिए जान देने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता है। देव के दोस्तों ने बताया कि उसके स्वभाव के कारण सभी उसे प्यार करते थे। वह बेहद शांत स्वभाव का था।
विधायक सहित कई लोगों ने परिजनों को बंधाया ढाढ़स
लालपुर। देव बहादुर के शहीद होने की सूचना पर किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ग्राम गौरीकला स्थित उनके घर पहुंचे। उन्होंने शहीद के पिता को सांत्वना दी। इसके अलावा कांग्रेस महासचिव हरीश पनेरू, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री डॉ. गणेश उपाध्याय, ग्राम प्रधान लक्ष्मी यादव, सुरेश कुमार, वंदना कुशवाहा, भगवान सिंह, राकेश कुमार, वीरेंद्र यादव, राजेश कुमार, सदरे आलम, हृदयानंद कुशवाहा, अनिल कुमार आदि ने भी देव के परिजनों को ढाढ़स बंधाया। इधर, भाजपा नेता अजय तिवारी और कृषक एवं स्वतंत्रता सेनानी संगठन के संयोजक कर्नल प्रमोद शर्मा ने भी शोक जताया है। प्रमोद ने बताया कि देव अच्छे धावक थे।
धूमधाम से बहन की शादी करने की हसरत रह गई अधूरी
लालपुर। शहीद देव बहादुर की बहन के हाथ पीला करने की इच्छा अधूरी रह गई। वह एकलौती बहन गीता की शादी धूमधाम से करना चाहते थे लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। देव बहादुर के पिता शेर बहादुर को गरीबी विरासत में मिली थी। वह बचपन से ही लोगों के पास मजदूरी करके जीवनयापन करते थे। मेहनत मजदूरी करके उन्होंने बच्चों को पढ़ाया। उनके बेटे किशन बहादुर, देव बहादुर और अनुज ने स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की। बड़ा बेटा किशन जब फौज में भर्ती हुआ तो परिवार की आर्थिक हालत सुधरी थी। उसके बाद देव के भी फौज में जाने के बाद घर में खुशियां आने लगीं।
घर आने पर दोनों भाई माता-पिता के साथ बैठ कर एकलौती बहन गीता की शादी अच्छी जगह करने के ख्वाब बुनते थे। पिता शेर बहादुर के अनुसार देव अपनी बड़ी बहन की शादी धूमधाम से करने के बाद ही अपनी शादी करना चाहता था। दोनों भाई माता-पिता की गरीब जिंदगी को देख चुके थे और अब उन्हें पूरा सुख देना चाहते थे। दोनों भाइयों ने पहले पक्का मकान बनवाया। बहन को भी अच्छी शिक्षा दिलाई। लेकिन अचानक हुए हादसे ने परिवार को झकझोर दिया। बहन गीता बेसुध पड़ी बार-बार भाई को पुकार रही थी।
किच्छा के ग्राम गौरीकला में शहीद के पिता को सांत्वना देते विधायक शुक्ला।- फोटो : RUDRAPUR
किच्छा के ग्राम गौरीकला में रोते बिलखते शहीद के परिजन।- फोटो : RUDRAPUR
किच्छा के गौरीकला निवासी शहीद देव बहादुर।- फोटो : RUDRAPUR
किच्छा के गौरीकला निवासी शहीद देव बहादुर।- फोटो : RUDRAPUR