सिडकुल मेें सात सौ करोड़ रुपये के घोटाले के खुलासे को लेकर सरकार ने एसआईटी बनाकर शुरूआती जांच तो शुरू करा दी लेकिन तकनीकी कमेटी का गठन आज तक नहीं किया जा सका। ऐसे में घोटाले की जांच पड़ताल पर एक साल से अधिक समय से ग्रहण लगा हुआ है। हालांकि सिडकुल में हुए निर्माण में लागत का सही अनुमान लगाने के लिए एसआईटी के अधिकारियों ने तकनीकी कमेटी बनाने के लिए प्रस्ताव एक साल पहले ही बनाकर शासन को भेज दिया था।
वर्ष 2012 से 2017 तक पंतनगर सिडकुल में बनाए गए सिटी पार्क में यूपी निर्माण निगम की ओर से कई निर्माण कार्य किए गए थे। सरकार की ओर से कराए गए ऑडिट में निर्माण कार्यों के साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन निर्धारण में कुछ अनियमितताएं मिली थीं। जांच के लिए शासन के आदेश पर एसआईटी का गठन कर दिया गया था। एसआईटी को सिडकुल में स्थापित सिटी पार्क की पड़ताल में पार्क में मुख्य द्वार, शौचालय, फव्वारे, सीसी मार्ग व चहारदीवारी निर्माण में वित्तीय अनियमितताएं मिली थीं।
इसके अलावा काशीपुर एस्कार्ट फार्म स्थित सिडकुल इंडस्ट्रियल एरिया में विभिन्न सेक्टरों को जाने वाली सड़कों के किनारे बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाए स्ट्रांग वाटर ड्रेन में भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं। अधिकारियों के अनुसार सितारगंज सिडकुल में भी यूपी निर्माण निगम ने सड़क, वाटर टैंक और नालियों का निर्माण कराया था। इसके लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का खर्च दिखाया गया लेकिन निर्माण कार्य के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन और स्थलीय निरीक्षण करने पर तमाम अनियमितताएं उजागर हुईं।
अनियमितताओं का खुलासा करने के लिए एसआईटी लागत का आकलन नहीं कर पा रही थी इसलिए तकनीकी कमेटी बनाने के लिए सरकार को पत्राचार किया गया था। तकनीकी कमेटी में लोनिवि, सिंचाई विभाग, जल संस्थान के अधिकारियों को जोड़ा गया था ताकि हकीकत और निर्माण कार्य का सही आकलन किया जा सके।
ऑडिट रिपोर्ट में इस तरह हुआ था खुलासा
पार्क की 900 वर्ग फुट भूमि पर बनाए गए पुरुष और महिला शौचालय की लागत 42 लाख रुपये।
2100 वर्ग फुट भूमि में बनाए गए पार्क के मुख्य द्वार की लागत 58 लाख रुपये।
पार्क के 512 वर्ग फुट भूमि पर बनाए गए फव्वारों की लागत दो करोड़ रुपये।
पार्क के चारों तरफ बनी नहर की लागत 50 करोड़ से अधिक का अनुमान।
सिडकुल घोटाले की जांच पूर्ववत जारी है। लागत का सही अनुमान लगाने के लिए तकनीकी कमेटी बनाने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। अभी तक शासन की ओर से कमेटी बनाने का आदेश नहीं मिला है। तकनीकी कमेटी ही निर्माण की वास्तविक लागत का आकलन करेगी। कमेटी बनने के बाद जांच में तेजी आएगी। - देवेंद्र पिंचा, एसआईटी प्रभारी।