ऊखीमठ तहसील के 11 ग्राम पंचायतों की करीब 6 हजार आबादी सेंचुरी एरिया में बसे होने से का खामियाजा भुगत रही है। संचार सुविधा तो दूर यहां के ग्रामीण बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, और शिक्षा की सुविधा से भी वंचित हैं। अपनी मवेशियों के लिए चारापत्ती के लिए भी ग्रामीणों को वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है।
150 से अधिक परिवारों वाले बुरूवा में पेयजल संकट गहराया हुआ है। ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए नई पेयजल लाइन का प्रस्ताव चार वर्ष से शासन में धूल फांक रहा है। आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालय के भवन जर्जर हालत में हैं। यहां कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन सेंचुरी एरिया में होने से इसकी मरम्मत तक नहीं हो पा रही है।
आपदा से गांव की कई नाली भूमि धंसाव जोन में आ गई थी, लेकिन आज तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं। चिलौंड़ गांव के ग्रामीण सड़क तक पहुंचने के लिए 5 किमी पैदल नाप रहे हैं। यहीं स्थिति तोषी और गौंडार गांव की है, जो क्रमश: 8 और 6 किमी एकतरफ पैदल नाप रहे हैं।
सुविधाओं के नाम पर इन गांवों के लिए सिर्फ आश्वासन मिले हैं। गडगू गांव के लिए 8 किमी पेयजल लाइन, शिशु मंदिर, आंगनबाड़ी भवन नहीं बन पा रहे हैं। ग्राम प्रधान नरोत्तम प्रसाद, मोहन सिंह, शशि देवी, सुमन देवी, शाखा देवी का कहना है कि बीडीसी और तहसील दिवस पर वे हर बार अपनी मांगों को रखते हैं, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। और तो और घरों और गौशालाओं की मरम्मत करना भी मुश्किल हो रहा है।
8वीं के बाद नहीं पढ़ पातीं बेटियां
चिलौंड गांव की बेटियां 8वीं के बाद आगे नहीं पढ़ पाती हैं। गांव में जूनियर हाईस्कूल है। हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए 7 किमी पैदल कोटमा जाना पड़ता है, इस कारण अधिकांश बेटियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है।
ग्राम प्रधान मोहन सिंह राणा बताते हैं बीते चार वर्ष में 24 बेटियों ने 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। तोषी के बच्चों को 9वीं की पढ़ाई के लिए 8 किमी दूर त्रियुगीनारायण व गौंडार के बच्चों को 6 किमी दूर रांसी आना पड़ता है। इन दोनों गांवों में भी कई बेटियां 8वीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई हैं।
सेंचुरी एरिया में शामिल गांव
गांव परिवार
चौमासी 69
बुरूवा 107
गडगू 172
त्रिजुगीनारायण 270
चिलौंड 93
रांसी 235
गौंडार 75
रेंस 19
गौरीकुंड 100
तोषी 42
लोलछड़ा 30
सेंचुरी एरिया के गांवों के विकास संबंधित प्रस्ताव विभागीय स्तर पर लंबित नहीं हैं। हमारे स्तर से सभी प्रस्तावों को संबधित विभागों के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। -नीतू लक्ष्मी एम उप वन संरक्षक, केदारनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर (चमोली)