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गुप्तकाशी: फिर से दौड़ने की कोशिशबारिश ने इस बार धारकोट गांव में मचाई तबाही

Sat, 18 Jun 2016 09:06 PM IST
रुद्रप्रयाग/ अमर उजाला ब्यूरो
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 16/17 जून की आपदा से तहस-नहस गौरीकुंड धीरे-धीरे अपने पुराने स्वरूप में लौट रहा है। इस वर्ष यात्रा के दौरान बाजार जहां खूब चहलकदमी नजर आ रही है। गौरीकुंड फिर से दौड़ने की कोशिश कर रहा है। सड़क से लेकर बाजार तक कई दुकानें मध्य रात्रि तक खुली नजर आ रही हैं।
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केदारनाथ यात्रा के अंतिम बस्ती पड़ाव गौरीकुंड में आपदा से पहले यात्रा को लेकर जो उल्लास बिखरा रहता था, वह लौटता दिख रहा है। यह उल्लास व्यापारियों से लेकर आमजन के चेहरे पर भी झलक रहा है। भोर से लेकर देर रात तक खुला बाजार और दुकानों में नजर आते ग्राहक हो चाहे लॉज, होटल के रिस्पेशन काउंटर पर लगी लाइन, सुखद अनुभूति दे रहा है। केदारनाथ यात्रा का यह महत्वपूर्ण पड़ाव अपने खोए वजूद को फिर से हासिल कर रहा है। जून 2013 के बाद से पसरा सूनापन और खामोशी छंट रही है।

स्थानीय वयोवृद्ध कुलानंद गोस्वामी कहते हैं इस वर्ष की स्थिति देखकर बेहतर कल नजर आ रहा है। तीन वर्ष से बंद पड़े लॉज, होटल और दुकानें इस बार खुल गई हैं, जिसमें खरीददार भी पहुंच रहे हैं। कई स्थानीय लोगों ने नई दुकानें भी खोली हैं। गौरीकुंड के ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी का कहना है कि मई माह में अधिकांश दुकानें एक बजे रात तक भी खुली रही।
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नहीं संवरा तप्तकुंड
रुद्रप्रयाग। आपदा के तीन वर्ष बाद भी गौरीकुंड के तप्तकुंड की सुध नहीं ली गई। आपदा में ध्वस्त हुए कुंड का गर्म पानी रिसकर मंदाकिनी नदी किनारे बाहर निकल रहा है, जिसे प्लास्टिक के पाइप में संरक्षित किया जा रहा है। इस प्राचीन और धार्मिक महत्व वाले तप्तकुंड को संवारने के बीकेटीसी ने वाडिया के वैज्ञानिकों की मदद की बात कही थी,  लेकिन संस्थान की ओर से एक बार सर्वे के बाद पुन: मंदिर समिति को कोई जवाब नहीं दिया गया। इधर शासन, प्रशासन ने भी सिर्फ कोरे आश्वासन ही दिए हैं।
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