शासन से बजट की मार और यूपी निर्माण निगम की सुस्त रफ्तार निर्माणाधीन स्कूल भवनों पर भारी पड़ रही है। राज्य योजना में 2006 से 20012 तक 14 माध्यमिक विद्यालयों के लिए नए भवन स्वीकृत किए गए।
बावजूद इसके अब तक एक भी भवन पूरा नहीं हो पाया है। जीआईसी चमकोट, घंघासू बांगर और हाईस्कूल पांडवस्थली निर्माण वर्ष 2011 से बंद है।
यहां पुराने जर्जर भवन के कमरों में ही कक्षाएं चल रही हैं। अन्य भवनों का दो-दो बार रिवाइज इस्टीमेज शासन को भेजा जा चुका है।
इधर निगम के पौड़ी इकाई के एई एनएन बर्तवाल का कहना है कि सरकार से धन देरी से मिलने और निर्माण सामग्री की दरें बढ़ने से स्कूल भवनों का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
प्राथमिक में भी हाल बुरे
जनपद में 94 प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर हैं। मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए धन नहीं मिल पा रहा है। जिला योजना में 2012-13 से लेकर 2015-16 तक 140 स्कूलों के भवनों का पुनर्निर्माण और 41 की मरम्मत के लिए भी धन के लाले पड़े हैं।
सात स्कूल भवनों का आपदा रिलीफ प्रोग्राम में निर्माण चल रहा है। 33 विद्यालय भवनों का निर्माण अलग-अलग स्वयं सेवी संस्थाएं कर रही हैं।
केस एक -
वर्ष 2006 में जीआईसी रुदप्रयाग के नए भवन के लिए 83.85 लाख
स्वीकृत हुए थे। यूपी निर्माण निगम ने वर्ष 2010 में 116.83 लाख और फिर
पुन: नई स्वीकृत दरों पर वर्ष 2014 में 145.80 लाख रुपये का रिवाइज
इस्टीमेट भेजा। पैसा मिलने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
केस दो -
जीआईसी
सिद्धसौड़ में भवन निर्माण के लिए वर्ष 2007 में 8.70 लाख स्वीकृत हुए थे।
यूपी निर्माण निगम इस राशि में काम आधा-अधूरा कर पाया। वर्ष 2014 में नई
दरों पर 131.20 लाख का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया। यहां अब भी निर्माण की
रफ्तार बहुत सुस्त है।
कोट-
यूपी निर्माण की ओर से बनाए जा रहे भवनों को पूरा करने को लेकर बीते दिनों सचिवालय में भी बैठक हुई थी। कुछ भवनों का काम अंतिम चरण में है। प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में जर्जर भवनों की मरम्मत व पुनर्निर्माण को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई चल रही है। - सुभाष चंद्र भट्ट, सीईओ रुद्रप्रयाग