भारत सरकार की महत्वकांक्षी नमामि गंगे योजना उत्तराखंड के काश्तकारों को आर्थिक रूप से भी मजबूत करेगी। इस योजना में वन विभाग काश्तकारों को प्रेरित करेगा, जिससे भूमि संरक्षण के साथ-साथ फलदार व आर्थिक महत्व की प्रजातियों के उत्पादन से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं यह पलायन रोकने में भी कारगर साबित होगी।
योजना के तहत वन विभाग की मदद से काश्तकारों को अपनी निजी व सामुदायिक भूमि में फलदार व आर्थिक महत्व की प्रजातियों का रोपण करना है। विभाग इच्छुक काश्तकारों को प्रति हेक्टेयर 150 पौध उपलब्ध कराएगा। स्थल विशेष की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर ही काश्तकार को पौधों का वितरण होगा, जिससे काश्तकार को अधिक लाभ मिले।
रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की ओर से जिले के अगस्त्यमुनि, जखोली और ऊखीमठ ब्लाक में 235 गांवों में इच्छुक काश्तकारों को फलदार व अन्य पौधे वितरित किए जाएंगे। रोपण के बाद काश्तकार को पहले व दूसरे वर्ष में रोपित पौधों की देखभाल के लिए 25 रुपये प्रति पौधा मदद भी मिलेगी।
इन प्रजातियों का किया जाएगा
भीमल, फाईकस प्रजाति के तहत बरगद, पीपल आदि सहित शीशम, तुन, शहतूत, कचनार, बांस, अखरोट, आडू, सेब, आर्टोकार्पस, आंवला, खड़िक, मेहल, आम, लीची के पौध काश्तकार को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
इनका कहना है -
नमामि गंगे को काश्तकार की आर्थिकी से जोड़ा गया है। ऐसे में जहां भूमि संरक्षण होगा। वहीं फलदार व अन्य आर्थिक प्रजातियों के उत्पादन से काश्तकार को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। जिले में इच्छुक काश्तकार योजना का लाभ लेने के लिए प्रभागीय कार्यालय से कभी भी संपर्क कर सकते हैं।
-- राजीव धीमान, डीएफओ, रुद्रप्रयाग