जंगलों में लगी भीषण आग के चलते यहां जलसंस्थान के चार बड़े पेयजल स्रोत सूख गए हैं और कई स्रोत सूखने के कगार पर हैं। रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र को जलापूर्ति करने वाले पुनाड़ गदेरा स्रोत पर पानी काफी कम हो गया है। कई इलाकों में हफ्ते में एक-दो दिन ही कुछ समय के लिए पानी की सप्लाई हो पा रही है।
नगर क्षेत्र की करीब 15 हजार आबादी को जलसंस्थान द्वारा पुनाड़ गदेरा के स्रोत से पानी की आपूर्ति की जा रही है। पिछले तीन माह से स्रोत पर पानी लगातार घट रहा है। वर्तमान में नगर क्षेत्र में 1850 एलपीएम पानी की जरूरत है, लेकिन मिल रहा है सिर्फ 300 एलपीएम पानी।
इन हालात में नगर के गुलाबराय, भाणाधार, रैंतोली में जहां हफ्ते में एक या दो बार ही पानी पहुंच रहा है, वहीं जीआईसी क्षेत्र, डांगसेरा, हितडांग, अपर बाजार आदि इलाकों में दिन में कुछ देर पानी की सप्लाई हो रही है। पुनाड़ गदेरे में नाममात्र का पानी बह रहा है।
जखोली ब्लाक के भरदार और सिलगढ़ सहित अगस्त्यमुनि ब्लाक के तल्ला नागपुर क्षेत्र में बड़े स्रोतों पर पानी काफी कम हो गया है। इधर, धनपुर और बच्छणस्यूं पट्टी के कांडा, सुखतोली सहित नौगांव, खांकरा, फतेहपुर, मरगांव, पणधारा, कलेथ, गहड-खाल्यूं, खेड़ाखाल, बंगोली, निषणी, पौड़ीखाली, चुलधार, छुयापाणी आदि गांवों/तोकों में ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जिले में 150 से अधिक छोटे-बड़े स्रोतों पर 35 से 75 प्रतिशत पानी कम हुआ है।
मौसम की बेरुखी के बीच जंगलों की आग से पेयजल स्रोतों पर पानी तेजी से कम हो रहा है। मुख्य बड़े स्रोतों पर पानी कम होने से स्थिति विकट हो रही है। बावजूद सभी इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। टैंकर भी बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
- सत्येंद्र गुप्ता, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान