कारी स्कूलों में लगातार छात्र संख्या घट रही है। स्थिति यह है कि शून्य छात्र संख्या के कारण जिले में पांच प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। यहां नियुक्त शिक्षक/शिक्षिकाओं को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है। जिले में पांच वर्षों में अब तक 14 प्राथमिक और 3 जूनियर हाईस्कूल बंद हो चुके हैं।
तमाम दावों, घोषणाओं, आश्वासनों और शासनादेशों के बावजूद शिक्षा की तस्वीर बदल नहीं रही है। मॉडल स्कूल उद्घाटन को तरस रहे हैं। वहीं प्राइमरी स्कूल छात्र-छात्राओं के अभाव में बंद हो रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जुलाई माह में राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोल्ठा, पणधारा, रॉलखेत, मैयकोटी और भैंसगांव बंद कर दिया गया है। यहां वर्तमान सत्र में एक भी पंजीकरण नहीं हुआ था। अन्य कई विद्यालय भी बंद होने के कगार पर हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में 70 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों व 10 से अधिक जूनियर हाईस्कूल में 10 से कम छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। बावजूद स्कूलों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए कारगर उपाय नहीं हो रहे हैं।
प्राइमरी स्कूलों में घट रहे बच्चे
रुद्रप्रयाग। प्राथमिक स्तर पर सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या निरंतर घट रही है। शिक्षण सत्र 2014-15 में जिले में 16503 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। 2015-16 में घटकर 15360 पहुंच गई। वर्तमान सत्र में लगभग एक हजार छात्र कम हुए हैं।
बंद हो चुके स्कूल
रुद्रप्रयाग। जिले में राजकीय प्राथमिक विद्यालय ड्उटी, पारतोली, पाली-नवीन, धारवाली, बष्टी, त्यूंग, देवसाल, सोविनो, गिवाली गांव, मोल्ठा, पणधारा, रॉलखेत, मैयकोटी, भैंसगांव, जूनियर हाईस्कूल गौरीकुुंड, भटवाड़ीसैंण और कांडा-सिमतोली।
सरकारी स्कूलों में कम होती छात्र संख्या चिंता का कारण है। शून्य छात्र संख्या के कारण इस सत्र में पांच प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। स्कूलों के अस्तित्व बनाए रखने के लिए विभाग के साथ-साथ अभिभावकों को भी विभाग का सहयोग करना होगा। - सुभाष चंद्र भट्ट, सीईओ रुद्रप्रयाग