पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रा को सुगम व सरल बनाने के लिए सरकारी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। केदारनाथ धाम को छोड़कर अन्य चार केदार में जरूरी सुविधाएं तक नहीं जुट पाई हैं। स्थिति यह है कि दो वर्ष पहले केदारनाथ वन प्रभाग की ओर से पंच केदार को एक ट्रैक से जोड़ने का प्रस्ताव भी फाइलों में दम तोड़ रहा है।
जून 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम सहित द्वितीय केदार मद्महेश्वर, तृतीय केदार तुंगनाथ, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ और पंचम केदार कल्पेश्वर धाम को एक ट्रैक से जोड़ने की कवायद की गई थी। केदारनाथ वन प्रभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया था।
इसके तहत पंच केदार के पैदल मुख्य ट्रैकों का चौड़ीकरण सहित पूरे मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य जरूरी इंतजाम की बात कही गई थी। इसके अलावा वैकल्पिक 60 किमी नए रास्ते का निर्माण होना था। इससे केदारनाथ से रुद्रनाथ, रुद्रनाथ से तुंगनाथ और तुंगनाथ से मद्महेश्वर को जोड़ा जाना था। सितंबर 2014 में भेजे गए इस प्रस्ताव पर अब तक अमल नहीं हो पाया है।
बिजली, पानी के भी लाले
पंचम केदार कल्पेश्वर को छोड़ दें, तो अन्य तीन धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सड़क से 3.5 किमी से लेकर 18 किमी पैदल दूरी तय करनी होती है। पैदल मार्ग पर बिजली, पानी, शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। जबकि यहां स्थानीय सहित पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र से अधिकाधिक यात्री पहुंचते हैं।
पंच केदार का पौराणिक महत्व
पंच केदार में भगवान शिव के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। केदारनाथ में जहां पृष्ठ भाग की पूजा होती है। वहीं द्वितीय केदार मद्महेश्वर में नाभि, तृतीय केदार तुंगनाथ में बाहु भाग, चतुर्थ केदार रुद्रप्रयाग में मुख और कल्पेश्वर में जटाओं की पूजा होती है।
पंच केदार को एक ट्रैक से जोड़ने से केदारनाथ की तरह अन्य धामों को भी पहचान मिलती। आपदा के बाद भी धार्मिक पर्यटक स्थलों में सुरक्षा और जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं।
- दिनेश बगवाड़ी, तीर्थ पुरोहित केदारनाथ
वर्ष 2014 में प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बाद शासन से विभाग को इस संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है।
- नीतू लक्ष्मी, डीएफओ, केदारनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर