मदोला गांव की 40 वर्षीय दिव्यांग सरिता ने पहली बार मतदान किया तो खुशी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी। बोलने-चलने में असक्षम सरिता को परिजन डंडी में पोलिंग बूथ तक लाए और मतदान कराया। सरिता जैसे कई दिव्यांग मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस महापर्व में शामिल होकर अन्य मतदाताओं में उत्साह भरा।
रुद्रप्रयाग विधानसभा में इस बार दिव्यांग मतदाताओं ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। कठिनाईयों के बावजूद पोलिंग बूथ तक पहुंच रहे दिव्यांग मतदाताओं ने अन्य मतदाताओं को भी प्रेरित किया। इन जरूरतमंद मतदाताओं को घर से बूथ और पुन: घर पहुंचाने की जिम्मेदारी परिजनों के साथ-साथ एनसीसी कैडिट व एनएसएस के स्वयंसेवियों ने भी बखूबी निभाई।
जिले में अन्य केंद्रों पर भी कई दिव्यांगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
घोड़े पर बैठ कर बूठ पहुंची 65 वर्षीय बुजुर्ग:
बडासू गांव के एक 65 वर्षीय बुजुर्ग भी घोड़े में सवार होकर मतदान केंद्र तक पहुंचे। स्थानीय निवासी दिव्यांग रवींद्र ने बेलणी पोलिंग बूथ पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं नरकोटा के विशंभर प्रसाद भट्ट भी अपने पुत्र के सहारे मतदान केंद्र तक पहुंचे और वोट दिया।
दिव्यांग रवींद्र ने बेलणी पोलिंग बूथ पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। बच्छणस्यूं के कठैत गांव के 43 वर्षीय मनोज कुमार, बिना किसी मदद के मतदाता केंद्र कांडई पहुंचे। उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद बताया कि, वे स्वच्छ और समृद्ध लोकतंत्र के लिए वोट देने पहुंचे हैं। दूसरी तरफ केदारनाथ विस में भी दिव्यांग वोटरों ने वोट दिया। प्रशासन के अनुसार 70 फीसदी से अधिक ने इन मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।
102 वर्ष की सावित्री देवी ने दिया वोट
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ विधानसभा के बडासू गांव की 102 वर्षीय सावित्री देवी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उनका नाती उन्हें पीठ में उन्हें पोलिंग बूथ तक लाया। वृृद्ध सभी चुनाव में वोट देती आ रही हैं। वहीं, कालीमठ घाटी के कोटमा गांव की 89 वर्षीय वृद्धा को मतदान स्थल तक लाने व वोट देने के बाद घर भेजने में जीआईसी कोटमा की छात्राओं ने अपना सहयोग दिया। रुद्रप्रयाग विस में उरोली गांव की 92 वर्षीय वृद्धा कवित्री देवी ने भी जखोली पोलिंग बूूथ पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।