चुनावी दंगल में नेताओं के साथ-साथ जल संस्थान के अधिकारी इतने व्यस्त हो गए कि पेयजल योजना को हैंडओवर करना ही भूल गए हैं। दोनों विभागों की लापरवाही से 60 गांवों को सर्दियों में भी पानी संकट से जूझना पड़ रहा है।
अगस्त्यमुनि ब्लाक में पड़ते तल्ला नागपुर पट्टी के 60 गांवों के लिए वर्ष 2009-10 में लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी। शासन से योजना के निर्माण के लिए 28 करोड़ रुपये मिले।
2011 में कार्यदायी संस्था ने पहले फेज में 23 करोड़ में लिफ्ट पंप लगाने के साथ मुख्य पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया गया। योजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता सहित भूमि विवाद को लेकर समय-समय पर कार्य भी प्रभावित होता रहा।
इसके बावजूद स्टोर टैंक और संपर्क लाइनों को बिछाने का काम वर्ष 2013-14 में किया गया। इस पर पांच करोड़ रुपये खर्च हुए। अब जब योजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, तो योजना हैंडओवर की प्रक्रिया सिरे न चढ़ने से योजना अधर में लटकी हुई है।
कार्यदायी संस्था जल निगम द्वारा पेयजल सप्लाई की टेस्टिंग भी की जा चुकी है, जोकि सफल रही है। स्थानीय संदीप रावत, एमएस रावत, रणजीत सिंह बर्तवाल, शैलेंद्र गुसांई, बीएस कठैत का कहना है कि उत्तराखंड पेयजल निगम और जलसंस्थान विभाग के बीच तालमेल नहीं होने से योजना अधर में लटक गई है।
लगभग एक वर्ष से देखरेख के अभाव पंप, स्टोर टैंक और पाइप लाइन को भी क्षति पहुंचने का खतरा बना है। उन्होंने जिलाधिकारी से योजना को जलसंस्थान विभाग को जल्द हैंडओवर कराने की मांग की है।
तल्ला नागपुर पपिंग योजना का निर्माण कार्य लगभग एक साल पहले पूरा हो चुका है। योजना के सभी परीक्षण सफल रहे हैं। जलसंस्थान को हैंडओवर को लेकर पत्र भेजा गया था, लेकिन जल संस्थान से कोई जबाब नहीं मिला है।
--- एसके बरनवाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम रुद्रप्रयाग।
प्रशासन की मौजूदगी में पहले योजना का संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। निगम द्वारा पत्र जरूर मिला है, लेकिन विधानसभा निर्वाचन प्रक्रिया की जिम्मेदारी के चलते, निगम को पत्र का जबाब नहीं दे पाए हैं। 15 फरवरी के बाद ही हैंडओवर की कार्रवाई हो पाएगी।
--- एसके गुप्ता, अधिशासी अभियंता जल संस्थान, रुद्रप्रयाग।