वर्ष 2007 में ग्राम पंचायत मदोला के लिए उरेडा से आठ सोलर लाइटें स्वीकृत हुई थी। इन सोलर लाइटों की कीमत उस समय 1 लाख 95 हजार 992 रुपये थी। उरेडा की ओर से इतने वर्ष बाद भी लाइटें नहीं लगाई गई हैं।
गांव के सत्यपाल सिंह नेगी ने बताया कि कई बार परियोजनाधिकारी को अवगत कराने पर भी उनके स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी में उरेडा ने उपलब्ध कराई गई सूचना में यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस मकसद से ये सोलर लाइटें मदोला गांव के लिए स्वीकृत की गई।
इन लाइटों को गांव में कहां-कहां लगाया जाना था। प्रति सोलर लाइट की वास्तविक कीमत क्या थी और किन कारणों से अब तक गांव में लाइटें नहीं लग पाई हैं। हैरत यह है कि विभाग ने अपने अभिलेखों में मदोला गांव में लाइटें लगाया जाना बताया है।
इधर, उरेडा के अधिकारियों का कहना है कि 8 सोलर लाइटों को तत्कालीन ग्राम प्रधान के अधीन किया गया था। स्थान चयनित नहीं होने से वे अब तक नहीं लग पाई हैं। नेगी ने डीएम से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई मांग की है।
इधर, जिलाधिकारी डा. राघव लंगर ने बताया कि अभी तक उनके संज्ञान में मामला नहीं है। जानकारी के बाद ही मामले में उचित कार्रवाई हो पाएगी।