दोपहर करीब ढाई बजे जैसे ही जाख देवता (पश्वा) ने अग्निकुंड में प्रवेश कर नृत्य के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने।
जाखधार में तीन दिवसीय आयोजित जाख मेले के आखिरी दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दोपहर को यक्षराज जाख देवता के पश्वा (मदन सिंह) ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नारायणकोटि गांव से नृत्य करते हुए कोठेड़ा और देवशाल होते हुए ढाई बजे जाख मंदिर में पहुंचे। यहां पुजारियों ने देवता का आह्वान किया, जिस पर पश्वा अग्निकुंड में कूद गए। ढोल-दमांऊ थाप पर जाख देवता काफी देर तक धधकते अग्निकुंड में नृत्य करते रहे। इस दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। इस मौके पर पूरा मंदिर परिसर व क्षेत्र जाख देवता के जयकारों से गूंज उठा। नृत्य के बाद पावन राख को श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने घर ले गए।
कोठेड़ा के पुजारियों, देवशाल के वेदपाठियों और नारायणकोटि के सेवक-श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक विधि-विधान से मंदिर में अग्निकुंड की रचना की गई। संक्रांति को अग्नि प्रज्ज्वलित कर अग्निकुंड की रात को चार पहर पूजा की गई। जाख मेला समिति के रेवती नंद देवशाली ने मेला के सफल संचालन के लिए क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। कहा कि आगामी समय में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा।
मेलों में की खूब खरीददारी
अगस्त्यमुनि/जखोली। अगस्त्यमुनि में दो दिवसीय बैशाखी मेला में बाजार में रौनक रही। इस दौरान दुकानों में खरीददारों ने खूब खरीददारी की। उधर, जखोली में भी बैशाखी मेला की धूम रही।