तीर्थपुरोहितों ने केदारनाथ मास्टर प्लान को धार्मिक मान्यताओं को खिलाफ बताया है। कहा कि उन्हें और हक-हकूकधारियों को किसी भी सूरत में देवस्थानम बोर्ड व मास्टर प्लान स्वीकार नहीं हैं। डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में तीर्थपुरोहितों ने कहा कि वे मास्टर प्लान के लिए किसी भी कीमत पर अपनी भूमि नहीं देंगे। कहना है कि केदारनाथ में शासन, प्रशासन स्थानीय लोगों व हक-हकूकधारियों के पुस्तैनी आवासीय व व्यवसायिक भवनों का अधिग्रहण कर उन्हें ध्वस्त कर वहां मंदिर समिति के भवनों का निर्माण करना चाहती है। जबकि केदारनाथ मंदिर की स्वयं की अपनी कई नाली भूमि है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। बावजूद निजी भूमि व भवनों का अधिग्रहण किया जा रहा है, जो उचित नहीं हैं। पत्र में केदार सभा के महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, विपिन सेमवाल, पूर्व जिपं सदस्य केशव तिवारी, जेपी तिवारी, गणेश तिवारी, प्रवीण तिवारी, सुबोध शुक्ला, टीपी तिवारी आदि के हस्ताक्षर है। वहीं केदारनाथ के विधायक मनोज रावत, तीर्थपुरोहित भगवती प्रसाद, लक्ष्मी नारायण जुगराण, किशन अवस्थी, राजकुमार तिवारी व डीडीएमए के ईई प्रवीण कर्णवाल ने भी इस संबंध में वार्ता की।