रुद्रपुर। गल्ला मंडी के आढ़तियों ने वेंडर जोन (विक्रय केंद्र) बनाने और मंडी के अंदर फड़ व्यवसाय वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए डीएम को ज्ञापन सौंपा। आढ़तियों ने कहा कि गल्ला मंडी की भूमि नगर निगम को हस्तांतरित करने से पहले किसानों का अनाज पलटने और बोली लगवाने के लिए दूसरी जगह दी जाए।
सोमवार को कलक्ट्रेट में विधायक राजकुमार ठुकराल के नेतृत्व में तराई मर्चेंट्स चैंबर के पदाधिकारी और कई आढ़तियों ने डीएम डॉ. नीरज खैरवाल से समस्याओं को लेकर वार्ता की। कहा कि काशीपुर रोड स्थित गल्ला मंडी में अनाज के क्रय विक्रय के लिए एक ही स्थान है। रबी एवं खरीफ की फसल के सीजन में अनाज की भारी आवक के कारण सड़क में जाम की स्थित हो जाती है, जिससे वहां जाम की समस्या बन जाती है। कहा कि नगर निगम को भूमि हस्तांतरित करने से पहले किसानों का अनाज पलटने-उतारने और बोली लगवाने के लिए कहीं अन्यत्र स्थान दिलाया जाना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में व्यापार मंडल महामंत्री हरीश अरोरा, राजेश घीक, श्याम सुंदर गर्ग, अखिलेश अग्रवाल, राजेश श्यामपुरिया, चंद्रन अग्रवाल, नवल अग्रवाल, रमेश अग्रवाल, सतीश बत्रा, सुभाष भुड्डी, अमन खंडेलवाल, विशाल आदि थे।
धान का भुगतान नहीं होने पर भड़के किसान, प्रदर्शन
खटीमा। धान के भुगतान से वंचित किसानों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन किया और अविलंब भुगतान की मांग की। बाद में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को संबोधित ज्ञापन एसडीएम की गैर मौजूदगी में तहसीलदार को सौंपा।
ब्लॉक अध्यक्ष गुरुसेवक सिंह ने कहा कि सीएम की घोषणा के अनुरूप धान का भुगतान नहीं मिला। सीएम को भेजे ज्ञापन में कहा कि किसानों से 64 करोड़ 55 लाख का धान क्रय कर सिर्फ 13 करोड़ का भुगतान दिया है, जबकि वित्तीय संस्थानों से लिए कर्ज की रिकवरी के लिए किसान को परेशान किया जा रहा है। नोटिस और घर में दबिश देकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। चेतावनी दी कि यदि किसानों को भुगतान समय पर नहीं दिया गया तो भाकियू आंदोलन शुरू करेगी।
प्रदर्शन में मझोला सोसाइटी अध्यक्ष जसविंदर सिंह पप्पू, झनकट सोसाइटी अध्यक्ष हरप्रीत सिंह, भजन सिंह राणा, गुरमीत कौर, गुरदेव सिंह, प्यारा सिंह, बलविंदर सिंह, नासिर खान, अर्जुन सिंह, बलजीत सिंह आदि थे।
लोहिया नहर के पानी में डूबी गेहूं की फसल
खटीमा। सिंचाई विभाग के लोहिया नहर की लीकेज से हल्दी घेरा के किसानों का करीब 16 एकड़ में बोया गेहूं और छह कोल्हू जलमग्न हो गए हैं। जलभराव से पीड़ित किसानों ने उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता यशपाल सिंह से नहर की मरम्मत की मांग की है।
टेड़ाघाट से मझोला लोहिया नहर का 17 किमी से आगे का निर्माण अधूरा है। सिंचाई विभाग ने नहर का निर्माण तो कर दिया लेकिन नहर की साइडों में मिट्टी भरान नहीं किया। टेड़ाघाट से नहर में छोड़ा गया पानी लीक होकर हल्दी घेरा क्षेत्र में भर गया। इससे गुरसेवक सिंह, बलदेव सिंह, पिसौरा सिंह, गुरचरन सिंह, गुरबाज सिंह, ग्यासुद्दीन आदि के करीब 16 एकड़ गेहूं जलमग्न हो गया। लीकेज के चलते गुड़ बनाने वाले अखलाक अहमद, साबिर हुसैन के तीन कोल्हू भी जलमग्न हालत में हैं। इससे किसान और कोल्हू संचालक परेशान हैं। इधर, उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता यशपाल सिंह ने बताया कि सत्रहमील से आगे कुछ किसानों ने नहर के कलमठ खुले छोड़ दिए हैं, जिससे पानी गेहूं के खेतों में भर गया। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर नहर बंद करा दी गई है।
गन्ना किसानों के लिए धरने पर बैठेंगे हरदा
शांतिपुरी। क्षेत्र में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गन्ना किसानों की समस्याओं को सुना और पांच दिसंबर को देहरादून में सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर उनके हित की लड़ाई लड़ने का भरोसा दिलाया।
शांतिपुरी नंबर 2 ढाकानी में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर गन्ना तौल नहीं होने और धान खरीद में किसानों से अतिरिक्त वसूली करने एवं भुगतान समय पर नहीं मिलने का आरोप लगाया। किसान कैप्टन देवेंद्र कोरंगा, प्रकाश बोरा, नारायण सिंह बिष्ट, गोपीचंद, शेर कोरंगा, ग्राम प्रधान चंद्रकला कोरंगा, विशन सिंह कोरंगा समेत कई किसानों ने आरोप लगाया कि किच्छा चीनी मिल 24 नवंबर को चालू होने के बावजूद दो दिसंबर तक क्षेत्र के गन्ना तौल सेंटरों को संचालित नहीं किया गया है।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार की गन्ना खरीदने की असमर्थता है। सरकार चाहती है कि किसी भी तरह किसानों को परेशान कर उन्हें प्राइवेट जगहों पर गन्ना देने के लिए मजबूर कर रही है ताकि उन्हें कम गन्ना खरीदना पड़े। वहां बिशन सिंह कोरंगा, लाल सिंह कोरंगा, रॉकी टाकुली, विनोद कोरंगा, चंदन कोरंगा, नारायण सिंह, उषा कोरंगा, वीरेंद्र कोरंगा, शेर सिंह, जिगर सिंह, दिवान सिंह आदि थे।