केदारनाथ के पूर्व विधायक ने बीकेटीसी पर लगाया बड़े घोटाले का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक मनोज रावत के नेतृत्व में सात सदस्यीय दल ने केदारनाथ पहुंचकर मंदिर के गर्भगृह की दीवारों व जलेरी में लगाए गए सोने का निरीक्षण किया। धाम से लौटकर कांग्रेस नेताओं ने सरकार और बीकेटीसी पर घोटाले का आरोप लगाया।
केदारनाथ के पूर्व विधायक का कहना है, केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में सोना लगाने का निर्णय औचित्यहीन था। जलेरी पर लगे सोना रंग बदल रहा है। पूर्व विधायक ने कहा कि केदारनाथ के गर्भगृह में सोने के नाम पर जो परतें लगाई गई है वह कार्य भी मानकों के तहत नहीं किया गया है। परतों की फिनिशिंग भी सही नहीं की गई है। इन परतों को लगाने से केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की शिलाओं पर अंकित शिलालेख भी दब गए हैं। जलेरी में सोने के बर्क के ऊपर एक्रैलिक की परत लगाई गई है जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कांग्रेस ने धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के उस बयान की भी कड़ी निंदा की है जिसमें उन्होंने मामले की जांच करने की बात कही है। कहा, धर्मस्व मंत्री स्वयं केदारनाथ आकर गर्भगृह की स्थिति को देखें। केदारनाथ किसी एक गांव, क्षेत्र का मंदिर नहीं है बल्कि सनातन धर्म से जुड़े भारतवर्ष और विश्व के कई देशों में रहने वाले शिव भक्तों की आस्था का प्रतीक है। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य कुलदीप कंडारी, गणेश तिवारी, नरेंद्र बिष्ट, पूर्व प्रमुख कमल सिंह रावत, तीर्थपुरोहित पुरुषोत्तम तिवारी और बीकेटीसी के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत मौजूद थे।
मुकदमा दर्ज किया तो जेल भरो आंदोलन होगा
रुद्रप्रयाग। पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने स्वर्णमंडित गर्भगृह की हकीकत को सबके सामने लाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। संपूर्ण तीर्थपुरोहित और क्षेत्रीय जनता उनके साथ हैं। अगर, उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई तो सभी कांग्रेसी जेल भरो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। संवाद
कहां गया 230 किलो सोना जवाब दें अध्यक्ष
रुद्रप्रयाग। कांग्रेस ने बीकेटीसी के अध्यक्ष से सवाल किया है कि वे 230 किलो सोना के बारे में स्पष्ट जानकारी दें। बीते वर्ष जब गर्भगृह को स्वर्णमंडित करने की बात चल रही थी तब समिति द्वारा कहा गया था कि 230 किलो सोना लगाया जाएगा। तब, कहा गया कि 550 सोने की परतें घोड़ा-खच्चरों से धाम पहुंचाई गई हैं लेकिन सात माह में ही यह सोना सिर्फ 23 किलो कैसे हो गया और इसका रंग क्यों उतर रहा है।