चार धाम यात्रा का सोमवार को आगाज हो जाएगा। श्री केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट विधि विधान से आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और आम लोगों में भारी उत्साह है। केदार धाम में कपाटोद्घाटन मौके का गवाह बनने के लिए रविवार देर शाम तक करीब साढ़े तीन हजार श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके हैं। धाम में रविवार को मौसम पूरी तरह साफ रहा।
बाबा केदार की उत्सव डोली पहुंची केदारनाथ
भगवान आशुतोष के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक श्री केदारनाथ धाम के कपाट सोमवार प्रात: सात बजे शुभ लग्न में विधि विधान से खोल दिए जाएंगे। इसके बाद ग्रीष्मकाल के छह माह तक बाबा केदार की पूजा धाम में ही होगी और भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।
यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह बना हुआ है। पैदल मार्ग से श्रद्धालुओं का धाम पहुंचने का सिलसिला बना हुआ है। इधर, रविवार सुबह नौ बजे गौरीकुंड के गौरी माई मंदिर से बाबा केदार की उत्सव डोली जयकारों एवं पुष्प वर्षा के बीच धाम के लिए रवाना हुए।
जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचौली होते हुए डोली दोपहर बाद करीब ढाई बजे केदारनाथ पहुंची। धाम में बीकेटीसी, प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने डोली का भव्य स्वागत किया। धाम में कपाट खुलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। डीएम डा. राघव लंगर ने बताया कि सोमवार को बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल डा. केके पाल हेलीकाप्टर से प्रात: 6.40 बजे धाम पहुंचेंगे।
ग्रामीणों ने गंगा को किया धाम के लिए विदा
शीतकालीन पड़ाव मुखबा से गंगा जी की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ गंगोत्री धाम के लिए रवाना किया गया। गंगा के मायकेवासियों ने भाव पूर्ण ढंग से बेटी को विदा किया। सैकड़ों श्रद्धालु गंगा जी की डोली यात्रा में शामिल हुए। देर शाम भैरोंघाटी पहुंची डोली यात्रा यहीं विश्राम करेगी और सोमवार सुबह गंगोत्री धाम के लिए रवाना होगी।
गंगा के शीतकालीन पड़ाव मुखबा में बीते कई दिनों से गंगा की विदाई की तैयारियां चल रही थीं। रविवार को सुबह शुभ मुहूर्त दस बजकर दो मिनट पर मुखबा स्थित गंगा मंदिर से निकालकर गंगा जी के स्वर्ण मुकुट और सरस्वती की मूर्ति को डोली में विराजमान किया गया।
श्रद्धालुओं ने गंगा जी का आशीर्वाद लिया। विधिविधान एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दोपहर एक बजे गंगा जी की डोली यात्रा गंगोत्री के लिए रवाना हुई। मार्कंडेय स्थित देवी मंदिर से मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को भी डोली में विराजमान किया गया।
हर्षिल स्थित सेना की 12 ग्रेनेडियर के बैंड और क्षेत्र के पारंपरिक ढोल-दमाऊ की अगुवाई में डोली यात्रा रवाना हुई। रास्ते में कोपांग में आईटीबीपी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोजन एवं जलपान की व्यवस्था की गई थी।
डोली यात्रा में गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल, शीतकालीन पुजारी राजेश सेमवाल, माया प्रसाद, अशोक सेमवाल, भागेश्वर सेमवाल, संजीव सेमवाल, रविंद्र सेमवाल, सूरतराम नौटियाल, अतर सिंह असवाल, खुशहाल नेगी आदि मौजूद रहे। महर्षि आश्रम गजोली से बड़ी संख्या में विदेशी साधकों ने भी डोली यात्रा में शिरकत की।
कलेऊ के साथ की बेटी विदा
मुखबा गांव से गंगा की विदाई बेटी को विदा करने जैसी रही। ग्रामीणों ने हर घर से आलू, रामदाना, कुट्टू, राजमा एकत्र कर बेटी के साथ कंडा कलेऊ दिया। रास्ते में उपला टकनौर क्षेत्र के मुखबा, हर्षिल, धराली, छोलमी, झाला, जसपुर, पुराली, सुक्की आदि गांवों के ग्रामीणों ने गंगा जी की डोली को भावभीनी विदाई दी।
सड़क ठीक हुई तो निकालेंगे गंगा की रथ यात्रा
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, पूर्व अध्यक्ष संजीव सेमवाल आदि तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि मुखबा से जांगला तक भी सड़क प्रस्तावित है। यह सड़क बन जाए तो जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा की तरह मुखबा से गंगोत्री तक गंगा जी की भी रथ यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि इस हिस्से में सीधी धूप के चलते सर्दियों में भी बर्फ ज्यादा नहीं टिकने से यह सड़क सर्दियों में भी यातायात के लिए खुली रहेगी।