एक तरफ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वनों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं वन, गांवों के विकास में बाधा बन रहे हैं। रुद्रप्रयाग जनपद में ऊखीमठ तहसील के 12 गांव सेंचुरी एरिया में हैं, जिस कारण गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हालात इस कदर हैं कि मवेशियों के लिए चारापत्ती की भी अनुमति लेनी होती है। योजनाएं एक दशक से शासनस्तर पर अटकी हैं।
सेंचुरी एरिया के गांवों में पेयजल, आंगनबाड़ी, स्कूल भवन मरम्मत, सुरक्षा दीवार, घेरबाड़ सहित कई सरकारी योजनाएं भी लंबित चल रही हैं। 107 परिवारों वाले गांव बुरूवा में एक दशक से पेयजल योजना शासन में लटकी हैं। यहां प्राथमिक विद्यालय का भवन क्षतिग्रस्त है।
वर्ष 1998 और 2012 में आई आपदा से गांव की कई नाली भूमि धंसाव जोन में आ गई थी लेकिन आज तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं। यही स्थिति तोषी गांव की भी बनी है। करोखी और चिलौंड गांव की पेयजल योजनाएं भी सेंचुरी के फेर में फंसी पड़ी हैं, जिस कारण ग्रामीणों को दूरस्थ प्राकृतिक स्रोतों से अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं।
गडगू गांव के लिए आठ किमी पेयजल लाइन, शिशु मंदिर का मंदिर, आंगनबाड़ी का भवन नहीं बन पा रहा है। रांसी और गौंडार गांव के मध्य मोबाइल टावर नहीं लग पा रहा है। स्थिति यह है कि कई पैदल मार्ग भी लंबित हैं। ग्राम प्रधान सरला देवी व शशि देवी का कहना है सेंचुरी एरिया में होने से गांवों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सड़क, स्कूल, अस्पताल जैसी जरूरतें भी सपने के समान हैं।
सेंचुरी एरिया में शामिल गांव
गांव परिवार
चौमासी 69
बुरूवा 107
गडगू 172
त्रिजुगीनारायण 270
चिलौंड 81
रांसी 235
गौंडार 75
रेंस 19
गौरीकुंड 100
तोषी 42
लोलछड़ा 30
सेंचुरी एरिया के गांवों को जरूरी सुविधाओं से जोड़ने के लिए शासन स्तर पर नियमों में कुछ प्रावधान कर वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। इसके तहत संबंधित ग्राम अपनी जरूरतों का प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं।
- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग