भुनका गांव आजादी के 69 वर्ष बाद भी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए आठ से 10 किमी पैदल चलते हैं। बीमार और गर्भवती महिलाओं को जंगल के रास्ते दंडी से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
अगस्त्यमुनि विकासखंड के धनपुर पट्टी के भुनका गांव के सड़क नहीं हैं। स्कूली बच्चों से लेकर ग्रामीणों को रोज मीलों पैदल दौड़ लग पड़ रहा है। सड़क के अभाव में बीते वर्षोे में गांव के दो लोगों की रास्ते में ही मौत हो चुकी है। बावजूद गांव के लिए सड़क निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
अति दुर्गम इस गांव में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद शायद ही कोई नेता, जनप्रतिनिधि या अधिकारी पहुंचा हो। ग्रामीणें को सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल रही है। ग्रामीण पवन राणा, सूरज राणा, धु्रव सिंह का कहना है कि जसोली-लाटू देवता मंदिर से गांव के लिए एक दशक पूर्व स्वीकृत सड़क का आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
शासन, प्रशासन व ग्रामीणों के विभाग को अवगत कराने पर भी आश्वासन ही मिले हैं। ग्राम प्रधान मंजू देवी ने गा्रमीणों की ओर से गांव के लिए स्वीकृत मार्ग के निर्माण के लिए उचित कार्रवाई की मांग की है
इंटर की पढ़ाई से वंचित बालिकाएं
राजकीय हाईस्कूल भुनका से दसवीं पास करने के बाद भुनका वल्ला, पल्ला व थपला गांव के बच्चों को इंटर के लिए आठ से 10 किमी एक तरफा पैदल चलकर जीआईसी रतूड़ा आना होता है। गांव से इंटर स्कूल के दूर होने के कारण कई बालिकाएं 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। चार वर्षों में गांव की 12 बालिकाएं हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
30 परिवार कर चुके पलायन
भुनका वल्ला व पल्ला व थपला गांव से एक दशक में 30 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। इन गांवों में अब भी 90 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।