द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को सभामंडप में विराजमान कर दिया गया है। डंगवाड़ी, ब्राह्मणखोली एवं उदयपुर गांव से चयनित चार महिलाओं द्वारा भगवान द्वितीय केदार मद्महेश्वर को नए अनाज का (छाबड़ी) भोग लगाया। बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली शनिवार 22 मई को अपने धाम के लिए प्रस्थान करेगी। जबकि 24 मई को धाम के कपाट खोले जाएंगे। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए डोली प्रस्थान व कपाटोद्घाटन में इस बार भी सीमित श्रद्धालु ही मौजूद रहेंगे।
बृहस्पतिवार को पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में सुबह 5.30 बजे से द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। मंदिर के पुजारी टी-गंगाधर लिंग ने गर्भगृह में भगवान मद्महेश्वर एवं ओंकारेश्वर का सामूहिक अभिषेक किया। श्रृंगार के उपरांत भगवान को महाभोग लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद पंच पुजारी शिव शंकर लिंग, गंगाधर लिंग ने द्वितीय केदार की भोग मूर्तियों को गर्भगृह से पंचकेदार गद्दीस्थल में विराजमान किया। जहां पर रावल भीमाशंकर लिंग ने हक-हकूधारियों एवं वेदपाठियों की मौजूदगी में षोडषोपचार और पंचोपचार पूजा करते हुए नवग्रह दान किया गया। धार्मिक औपचारिकताओं के निर्वहन के बीच रावल भीमाशंकर लिंग ने मद्महेश्वर धाम के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी शिव लिंग को छह माह का पूजा संकल्प दिया। साथ ही रावल ने आराध्य द्वितीय केदार की महाआरती उतारी। इसके बाद पुजारियां द्वारा ओंकारेश्वर मंदिर पंचकेदार गद्दीस्थल से भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को उनके सभामंडप में विराजमान किया गया। यहां पर धाम के लिए नियुक्त पुजारी शिव लिंग ने भगवान का श्रृंगार कर महाभोग के साथ महाआरती उतारी गई। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी घरों से नया अनाज एकत्रित किया गया। इसके बाद चयनित चार महिलाओं के द्वारा आराध्य का भोग तैयार किया गया। पूजा-अर्चना व धार्मिक परंपराओं के साथ द्वितीय केदार को यह भोग अर्पित किया गया। इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, प्रशासनिक अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण, वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी, यशोधर मैठाणी, पुष्कर सिंह रावत, पंच गौंडारी मदन सिंह पंवार, वीर सिंह पंवार सहित अन्य लोग मौजूद थे।