कौंच पर्वत स्थित देव सेनापति भगवान कार्तिकेय मंदिर में दो दिवसीय बैकुंठ चतुर्दशी पर्व धार्मिक अनुष्ठान के साथ शुरू हो गया है। मंदिर में संतान प्राप्ति के लिए 10 दंपति रात्रि जागरण करेंगे। रात्रि के सभी पहर भगवान की आरती की जाएगी।
शनिवार को मंदिर में पुजारियों ने विशेष-पूजा अर्चना कर हवन किया। इस मौके पर आराध्य भगवान कार्तिक स्वामी का अभिषेक कर श्रृंगार किया गया। क्षेत्र की महिला व युवक मंगल दलों ने कीर्तन-भजन का आयोजन भी किया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष शत्रुघन सिंह नेगी ने बताया कि शुक्रवार रात्रि को ही कई लोग मंदिर पहुंच गए थे। बताया कि रविवार को विशेष पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के साथ अनुष्ठान समाप्त हो जाएगा।
यह है मंदिर की मान्यता
रुद्रप्रयाग। मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय अपने पिता भगवान शिव व माता पार्वती से नाराज होकर क्रौंच पर्वत पर पहुंचे थे। बैकुंठ चतुर्दशी के दिन स्वर्ग लोक पर निवास करने वाले 33 करोड़ देवी-देवता उन्हें मनाने के पहुंचते हैं।
इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी इस पर्व पर ग्रामीण मंदिर में भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान कार्तिकेय 365 गांवों के आराध्य देव के रूप में पूजेे जाते हैं।