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बाबा के शीतकालीन गद्दी स्थल की नहीं ली सुध

Thu, 03 Nov 2016 10:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रप्रयाग
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kedarnath doli - फोटो : file photo
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यहां भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल की स्थिति दयनीय बनी हुई है। सरकार और बीकेटीसी ने ओंकारेश्वर मंदिर और परिसर क्षेत्र की सुध नहीं ली है।
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प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2014 में शीतकाल में भी ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार और तृतीय केदार भगवान मद्महेश्वर के दर्शन कराने का निर्णय लिया गया था, तब यहां यात्री सुविधाएं भी जुटाने की बात कही गई थी, लेकिन दो वर्ष गुजरने के बाद भी सुविधाओं के लिए यहां कोई काम नहीं हुआ। शंकराचार्य काल का यह मंदिर अपने में कई प्राचीन गाथाओं को संजोए हुए हैं।

यहां परिसर में पंचकेदार गद्दी स्थल, ऊषा-अनिरूद्ध विवाह स्थल, मद्महेश्वर सभा मंडप, बाराही मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, पंचकेदार लिंग स्थल एवं भोगमंडी मौजूद हैं, लेकिन ये सभी स्थल जर्जर हो चुके हैं। और तो और एक वर्ष से ओंकारेश्वर मंदिर के प्रवेश द्वार पर दरवाजे तक नहीं लग पाए हैं। पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट एवं आचार्य हर्ष जमलोकी का कहना है कि ओंकारेश्वर मंदिर व परिसर जर्जर हो रहा है। उन्होंने सरकार से यहां परिसर में मौजूद प्राचीन भवनों और अन्य छोटे मंदिरों की देखरेख व मरम्मत की मांग की है।
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इधर, पूर्व विधायक आशा नौटियाल ने सरकार से ओंकारेश्वर मंदिर का केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर सौंदर्यीकरण कराए जाने की मांग की है। कहा कि आपदा के बाद सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन शीतकालीन गद्दी स्थल की सुध नहीं ली जा रही है। बीकेटीसी के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर की मरम्मत का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। कार्यों के लिए शासन से धन स्वीकृत हो चुका है।
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30 हजार भक्तों ने किए दर्शन
इस वर्ष यात्राकाल में ओंकारेश्वर मंदिर में देश, विदेश और उत्तराखंड सहित अन्य प्रांतों के 30 हजार श्रद्धालुओं ने  दर्शन किए। यहां वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। सरकार द्वारा शीतकालीन यात्रा को शुरू कराए दो वर्ष हो गए हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां जरूरी सुविधाएं नहीं जुट पाई हैं। पूर्व विधायक शैलारानी रावत का कहना है कि सरकार घोषणाओं और आश्वासन में ही प्रदेश में तीर्थाटन, पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। 
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