पंतनगर एयरपोर्ट में नवनिर्मित बम निष्क्रिय करने की तकनीक का डायग्राम।
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पंतनगर। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने पंतनगर एयरपोर्ट को हाईटेक करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में रनवे की रिकॉर्पेटिंग का कार्य चल रहा है। साथ ही रन-वे के आखिरी छोर पर 70 लाख रुपये की लागत से बम निष्क्रिय करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक से कूलिंग पिट का निर्माण कराया गया है।
इससे एयरपोर्ट आपात स्थिति में बम (विस्फोटक) निष्क्रिय करने में सक्षम हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक इस तकनीक की सुविधा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डों में ही उपलब्ध होती थी।
एयरपोर्ट निदेशक एसके सिंह ने बताया कि यदि हमारे पास सूचना आती है कि विमान में बम है। तो यह एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया की सुरक्षा पद्धति के अनुरूप विमान को खाली कराया जाता है।
इसके तहत विमान को बिल्डिंग से दूर आइसोलेशन-वे में ले जाया जाता है। जिसके बाद सर्वप्रथम मानवीय जीवन सुरक्षित करने के लिए हम यात्रियों को निकालकर बस से टर्मिनल बिल्डिंग में ले आते हैं। उसके बाद सामान को उतारकर सघन चेकिंग के बाद आइसोलेशन यार्ड में एकत्र कर सुरक्षा घेरा बना दिया जाता है।
डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता आकर सामान सहित पूरे विमान की बारीकी से जांच करता है। यदि कोई विस्फोटक आदि मिलता है तो रोबोट उसे उठाकर दस मीटर गहरे कूलिंग पिट (गड्ढे) में ले जाता है। तीन खंडों में बने इस कूलिंग पिट का ढांचा ऊपर से ढका होता है। क्योंकि किसी को यह नहीं पता होता कि विस्फोट होने पर कितना प्रभाव डालेगा।
बम को ले जाकर उसे डिटोनेटर से विस्फोट कर नष्ट कर दिया जाता है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार कूलिंग पिट की यह खासियत होती है कि उसमें किए गए बम के विस्फोट का प्रभाव उसके बाहर नहीं आता है। बताया कि 1991 में श्रीलंका में लिट्टे उग्रवादियों ने एयरपोर्ट पर हमला कर वहां खड़े दस विमानों को बम से उड़ा दिया था।
तभी से ईजाद इस तकनीक को वर्तमान में प्रत्येक एयरपोर्ट के लिए जरूरी कर दिया गया है। पंतनगर एयरपोर्ट ने सुरक्षा को लेकर डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते के लिए पीएसी से अनुबंध किया है।